क्या है ऑटोनोमस डेटाबेस जो Oracle से 12 हजार भारतीयों की छंटनी की वजह बना

इन दिनों अमेरिकी कंपनी ओरैकल काफी चर्चा में है. वजह ये है कि कंपनी 30 हजार लोगों को कंपनी से निकाल रही है. बताया जा रहा है कि सिर्फ भारत से ही कंपनी ने अब तक 12 हजार लोगों को निकाल दिया है. सवाल ये है कि ऐसा क्यों हुआ? सिर्फ AI ही है या वजह कुछ और भी है. आइए जानने की कोशिश करते हैं.

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क्या है Oracle का ऑटोनोमस डेटाबेस क्या है Oracle का ऑटोनोमस डेटाबेस

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:05 PM IST

एक ईमेल आया और हजारों भारतीयों की जॉब चली गई. ओरैकल नाम की एक अमेरिकी कंपनी का ये फैसला चौंकाने वाला है. टोटल 30 हजार की छंटनी होनी है और अकेले भारत से कंपनी ने 12000 लोगों को निकाला है. ऐसा रिपोर्ट्स में कहा गया है. ये ट्रेंड आपको समझना चाहिए की ऐसा क्यों हो रहा है. क्या वही कर्मचारी जिन्हें कंपनी ने खुद हायर किया था अब वो काम के लायक नहीं बचे या बात कुछ और है?

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अमेरिकी टेक कंपनी Oracle में हो रही बड़ी छंटनी को अगर सिर्फ खर्च कम करना समझ रहे हैं, तो आप आधी कहानी देख रहे हैं. असल में यह पूरी टेक इंडस्ट्री के बदलते दौर की कहानी है, जहां कंपनियां अब इंसानों से ज्यादा मशीनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भरोसा करने लगी हैं.

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Oracle के मामले में यह बदलाव और ज्यादा साफ दिख रहा है, क्योंकि कंपनी अब खुद को एक ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर कंपनी से हटाकर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की दिग्गज कंपनी बनाना चाहती है.

AI के बहाने कॉस्ट कटिंग का खेल

इस बदलाव की जड़ में है पैसा और टेक्नोलॉजी का नया खेल. Oracle इस समय दुनिया भर में बड़े-बड़े डेटा सेंटर बना रही है, जो AI मॉडल्स को चलाने और ट्रेन करने के लिए जरूरी होते हैं.

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इन डेटा सेंटर को बनाना कोई छोटा काम नहीं है. महंगे GPU चिप्स, भारी बिजली खर्च, जमीन और कूलिंग सिस्टम पर अरबों डॉलर लगते हैं. यही वजह है कि कंपनी को अपने खर्च का बैलेंस बनाने के लिए कहीं न कहीं कटौती करनी पड़ रही है, और सबसे आसान रास्ता है कर्मचारियों की संख्या कम करना.

ऑटोमेशन से हो रहा इंसानों का नुकसान

आसान शब्दों में कहें तो जो पैसा पहले लोगों पर खर्च होता था, अब वही पैसा मशीनों और AI पर लगाया जा रहा है. Oracle के अंदर जो सबसे बड़ा बदलाव आया है, वह है ऑटोमेशन.

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पहले एक बड़े डेटाबेस को संभालने के लिए पूरी टीम लगती थी, लोग अपडेट करते थे, सिक्योरिटी देखते थे, सिस्टम मॉनिटर करते थे. लेकिन अब कंपनी के पास ऐसे सिस्टम हैं जो खुद ही यह सब काम कर लेते हैं.

Oracle का Autonomous Database इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो खुद अपडेट होता है, खुद सिक्योरिटी संभालता है और खुद ही परफॉर्मेंस सुधारता है. इसका सीधा मतलब है कि जिन कामों के लिए पहले 10 लोग चाहिए होते थे, अब वही काम 2-3 लोग और एक AI सिस्टम मिलकर कर सकते हैं.

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क्या है ओरैकल का ऑटोनोमस डेटाबेस

ओरैकल का ऑटोनोमस डेटाबेस असल में ऐसा स्मार्ट डेटाबेस है जो खुद ही अपना काम संभालता है. पहले डेटाबेस चलाने के लिए लोगों की टीम लगती थी. अपडेट करना, सिक्योरिटी देखना, परफॉर्मेंस सुधारना, बैकअप लेना. लेकिन अब यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से ये सारे काम खुद कर लेता है.

अब इसमें एक और बड़ा बदलाव आया है, AI Vector Database. इसका मतलब है कि यह डेटाबेस सिर्फ डेटा स्टोर नहीं करता, बल्कि डेटा को समझता भी है. यह टेक्स्ट, इमेज, वीडियो जैसे अनस्ट्रक्चर्ड डेटा में भी पैटर्न पहचान सकता है और मीनिंग के आधार पर सर्च कर सकता है. अब तक ये कीवर्ड बेस्ड सर्च पर काम करता था.

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इससे कंपनियां अपने डेटा से सीधे AI मॉडल जोड़ सकती हैं, बिना डेटा को कहीं और ले जाए. आसान भाषा में कहें तो Oracle अब ऐसा सिस्टम बना रहा है जहां डेटा, AI और ऐप ऑल इन वन एक ही जगह पर काम करते हैं. 

कोडिंग और सपोर्ट में बदलाव

इसी तरह कोडिंग और सपोर्ट जैसे कामों में भी तेजी से बदलाव हो रहा है. AI टूल्स अब कोड लिखने, बग ढूंढने और सिस्टम मॉनिटर करने में इंसानों की जगह लेने लगे हैं.

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क्लाउड सिस्टम खुद ही स्केल हो जाते हैं, खुद ही समस्या पहचान लेते हैं और कई मामलों में खुद ही ठीक भी कर लेते हैं. ऐसे में कंपनियों के लिए बड़ी टीम रखने का मतलब ही खत्म होता जा रहा है. यही वजह है कि Oracle जैसी कंपनियां अब कम लोग, ज्यादा काम वाले मॉडल पर जा रही हैं.

इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन नौकरियों पर पड़ रहा है जो बार-बार एक जैसे काम करती हैं. डेटाबेस एडमिन, सपोर्ट इंजीनियर, टेस्टिंग और बेसिक कोडिंग वाले रोल्स सबसे पहले निशाने पर हैं.

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अब सिर्फ एंट्री लेवल ही नहीं, बल्कि मिड और सीनियर लेवल की नौकरियां भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. क्योंकि जब AI खुद सिस्टम डिजाइन करने और ऑप्टिमाइज करने लगे, तो कंपनियों को कम लेकिन ज्यादा स्किल वाले लोगों की जरूरत होती है.

जिनकी जॉब्स जा रही हैं उनकी जगह कौन लेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन हजारों लोगों की नौकरी जा रही है, उनकी जगह कौन ले रहा है. इसका जवाब सीधा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-स्किल्ड इंजीनियर.

कंपनियां अब बड़ी टीम की जगह छोटी लेकिन ज्यादा इफिशिएंट टीम बनाना चाहती हैं, जहां हर व्यक्ति कई काम कर सके और AI टूल्स का इस्तेमाल करके ज्यादा आउटपुट दे सके. यानी फ्यूचर का मॉडल यही है कि एक इंजीनियर वही काम करेगा जो पहले पांच लोग मिलकर करते थे.

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यह कहानी सिर्फ Oracle तक सीमित नहीं है. दुनिया की लगभग सभी बड़ी टेक कंपनियां इसी डायरेक्शन में बढ़ रही हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि Oracle में यह बदलाव ज्यादा तेजी से दिख रहा है. यही वजह है कि इसे एक तरह से आने वाले समय का संकेत माना जा रहा है. 

कमाई कम नहीं, फिर भी छंटनी

सबसे अहम बात यह है कि यह छंटनी किसी मंदी या घाटे की वजह से नहीं हो रही, बल्कि यह एक तकनीकी बदलाव की वजह से हो रही है. यानी कंपनियां पैसे कमा रही हैं, लेकिन फिर भी कर्मचारियों को निकाल रही हैं, क्योंकि फ्यूचर में उन्हें उतने लोगों की जरूरत नहीं होगी.

ये भी समझना जरूरी है कि IT सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि बदल रहा है. जो लोग AI, क्लाउड और नई टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट करेंगे, उनके लिए मौके बढ़ेंगे. लेकिन जो पुराने तरीके से काम करते रहेंगे, उनके लिए यह दौर मुश्किल साबित हो सकता है.

 

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