भारत में अब सिर्फ खाना और किराना ही 10 मिनट में नहीं पहुंच रहा, घर की सफाई और बर्तन धोने के लिए भी लोग मोबाइल ऐप खोल रहे हैं. इसी बदलती आदत ने 23 साल की अंजलि सरदाना को हजारों करोड़ रुपये की कंपनी की मालकिन बना दिया.
उनकी कंपनी प्रोंटो आज भारत के सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स में गिनी जा रही है. कंपनी की वैल्यूएशन कुछ महीनों में करीब 1700 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है और निवेशकों की नजर अब इस नए बाजार पर टिक गई है.
ऐप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का शानदार यूज
अंजलि सरदाना की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने ऐसा सेक्टर चुना जिसे लंबे समय तक अनऑर्गनाइज्ड माना जाता था. भारत में घरों में काम करने वाली मेड, कुक और हेल्पर का पूरा सिस्टम ज्यादातर जान-पहचान और सोसाइटी गार्ड्स के भरोसे चलता था.
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कोई तय रेट नहीं, कोई भरोसा नहीं और कई बार अचानक मेड छुट्टी पर चली जाए तो पूरा घर परेशान हो जाता था. अंजलि ने इसी समस्या को बिजनेस मौके में बदल दिया.
उन्होंने प्रोंटो नाम का ऐप शुरू किया, जहां लोग मोबाइल से कुछ ही मिनट में सफाई, बर्तन, कपड़े धोने या किचन हेल्प जैसी सेवाएं बुक कर सकते हैं. कंपनी दावा करती है कि कई इलाकों में हेल्पर 10 से 15 मिनट के अंदर पहुंच जाते हैं. यही इंस्टेंट हाउस हेल्प मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
इस ऐप में AI को बेहतरीन तरीके से यूज किया गया है. चाहे ऐप का फ्रंट एंड हो या बैकएंड कंपनी ने यूजर इंटरफेस और एक्सपीरिएंस को काफी स्मूद रखा है. इसलिए भी ये ऐप काफी तेजी से डाउनलोड किया जा रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि अंजलि की उम्र सिर्फ 23 साल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने विदेश में पढ़ाई की और बाद में निवेश कंपनियों में काम किया. वहीं उन्होंने देखा कि भारत में घरेलू कामकाज का बाजार बहुत बड़ा है लेकिन टेक्नोलॉजी के हिसाब से अभी भी पीछे है.
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उन्होंने 2025 में गुरुग्राम से शुरुआत की. शुरुआत में कंपनी का सिर्फ एक हब था, लेकिन कुछ ही महीनों में यह कई शहरों तक पहुंच गई.
आज कंपनी हर दिन हजारों बुकिंग संभाल रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में जहां कंपनी के पास करीब 3000 बुकिंग प्रतिदिन थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 26000 से ज्यादा पहुंच चुका है. कंपनी ने हाल ही में 20 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाई है. इससे पहले भी उसे करोड़ों डॉलर का निवेश मिल चुका है.
डेटा और एल्गोरिद्म
प्रोंटो पहला ऐप नहीं है और ऐसे ऐप्स सिर्फ बुकिंग नहीं लेते, बल्कि पूरा सिस्टम एल्गोरिद्म और एआई के जरिए चलाते हैं. कौन सा हेल्पर किस इलाके में सबसे जल्दी पहुंचेगा, कौन सा कस्टमर रेगुलर है, किस समय सबसे ज्यादा मांग रहती है, किस कर्मचारी की रेटिंग बेहतर है, यह सब डेटा के जरिए तय होता है. इसी वजह से यह मॉडल पुराने घरेलू कामकाज सिस्टम से अलग दिखता है.
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प्रोंटो जैसे प्लेटफॉर्म अब हाइपरलोकल एआई मॉडल पर काम कर रहे हैं. मतलब ऐप लगातार यह सीखता रहता है कि किस इलाके में किस समय कौन सी सर्विस की मांग ज्यादा है. उसी हिसाब से वर्कर्स को तैनात किया जाता है. इससे इंतजार कम होता है और ग्राहक को इंस्टेंट सर्विस मिलती है. यही वजह है कि अब इस सेक्टर को कई लोग घर के काम का क्विक कॉमर्स कह रहे हैं.
अंजलि सरदाना का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ ग्राहकों की परेशानी दूर करना नहीं, बल्कि घरेलू काम करने वालों को ज्यादा स्थिर और सुरक्षित काम देना भी है. कंपनी वर्कर्स को ट्रेनिंग देती है, बैकग्राउंड चेक करती है और ऐप में एसओएस फीचर भी देती है. कई महिलाओं को सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
गिग वर्कर और नुकसान
हालांकि इस मॉडल पर सवाल भी उठ रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी तेज ग्रोथ वाले स्टार्टअप्स फिलहाल भारी डिस्काउंट पर चल रहे हैं और मुनाफा कमाना अभी चुनौती है. इतना ही नहीं, ये इस तरह के स्टार्टअप गिग वर्कर्स रखते हैं जिनके हितों का उतना ख्याल नहीं रखा जाता है.
कई कंपनियां कस्टमर्स को सस्ती सेवाएं देकर बाजार पकड़ने की कोशिश कर रही हैं. यही वजह है कि इस सेक्टर में अब बड़ी लड़ाई शुरू हो चुकी है. अर्बन कंपनी और दूसरी कंपनियां भी अब इंस्टैंट हाउस हेल्प मॉडल में उतर चुकी हैं.
भारत में पहले लोग किराना, टैक्सी और खाना ऐप से मंगाने के आदी हुए. अब घरेलू कामकाज भी उसी दिशा में बढ़ता दिख रहा है. और इस बदलाव के बीच 23 साल की अंजलि सरदाना अचानक देश के सबसे चर्चित युवा स्टार्टअप चेहरों में शामिल हो गई हैं.
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