Who is GS Laxmi: कौन हैं जीएस लक्ष्मी..? महिला वर्ल्ड कप फाइनल में मैच रेफरी होंगी

भारत की जीएस लक्ष्मी फाइनल में मैच रेफरी की भूमिका निभाएंगी. लक्ष्मी अब तक महिलाओं के 18 वनडे और 25 टी-20 अंतरराष्ट्रीय में मैच रेफरी की भूमिका निभा चुकी हैं.

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GS Laxmi (left) GS Laxmi (left)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 4:43 PM IST
  • AUS-इंग्लैंड के बीच होगा फाइनल
  • फाइनल में AUS का पलड़ा भारी

आईसीसी महिला विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया का सामना इंग्लैंड से होना है. रविवार (3 अप्रैल) को क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल में दोनों टीमें आमने-सामने होंगी. ऑस्ट्रेलियाई टीम अब तक टूर्नामेंट में अजेय है, वहीं इंग्लिश टीम ने शुरुआती तीन मुकाबलों में हार के बाद जबर्दस्त वापसी की.

फाइनल मुकाबला भारतीय रेफरी जीएस लक्ष्मी के लिए भी खास रहने वाला है. 53 साल की लक्ष्मी इस महामुकाबले में मैच रेफरी की भूमिका निभाएंगी. घरेलू महिला क्रिकेट में 2008-09 से मैच रेफरी की भूमिका निभा रही लक्ष्मी अब तक महिलाओं के 18 वनडे और 25 टी-20 अंतरराष्ट्रीय में मैच रेफरी की भूमिका निभा चुकी हैं. मेन्स क्रिकेट की बात की जाए, तो लक्ष्मी ने अबतक 5 वनडे और 16 टी20 इंटरनेशनल में यह दायित्व निभाया है. वह आईसीसी एमिरेट्स पैनल मे शामिल होने वाली पहली महिला मैच रेफरी हैं.

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जमशेदपुर में शुरू हुआ क्रिकेट करियर

लक्ष्मी का जन्म 23 मई 1968 को आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में हुआ था. वह जमशेदपुर में पली-बढ़ीं, जहां उनके पिता टाटा मोटर्स में काम करते थे. लक्ष्मी ने जमशेदपुर में ही क्रिकेट खेलना शुरू किया. 1986 में 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें जमशेदपुर महिला कॉलेज में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था. बाद में दक्षिण मध्य रेलवे में नौकरी हासिल करने के बाद वह 1989 में हैदराबाद चली गईं और बाद में दक्षिण मध्य रेलवे क्रिकेट टीम के लिए खेलना शुरू किया.

इंग्लैंड दौरे के लिए हुआ था चयन

लक्ष्मी ने 1989 और 2004 के बीच आंध्र महिला, बिहार, रेलवे, ईस्ट जोन और साउथ जोन की महिला टीमों सहित कई घरेलू टीमों का प्रतिनिधित्व किया. लक्ष्मी ने 1991 में शादी की. उन्हें अपनी शादी के दिन शेष भारत की टीम की तरफ खेलने का आमंत्रण मिला था, लेकिन उन्होंने क्रिकेट से थोड़े समय के लिए रेस्ट लेने का फैसला किया.

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बाद में उन्होंने दक्षिण मध्य रेलवे टीम के साथ क्रिकेट में वापसी की और 1995 में पहली बार इंटर-रेलवे खिताब जीतने में टीम की मदद की. उन्हें 1999 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम में चुना गया था, लेकिन एक भी मैच खेलने का चांस नहीं मिला. लक्ष्मी ने 2004 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

 

 

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