क्या आपने कभी वैभव सूर्यवंशी को खेलते हुए गौर से देखा है? अगर देखा है, तो आपने सिर्फ रन नहीं देखे… आपने एक अलग तरह की कला देखी है. और अगर नहीं देखा, तो समझ लीजिए- यह कहानी उसी अनोखे हुनर की है, जो उन्हें बाकी बल्लेबाज़ों से बिल्कुल अलग बनाती है.
क्रिकेट में बल्लेबाजी की तकनीक एक तय ढांचे में सिखाई जाती है- स्टांस लो, बल्ला उठाओ और फिर शॉट खेलो. लेकिन वैभव सूर्यवंशी इस पारंपरिक क्रम को तोड़ते नजर आते हैं. यही वजह है कि उनका खेल सिर्फ प्रभावशाली नहीं, बल्कि रहस्यमय भी लगता है.
पूर्व क्रिकेटर और विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने भी अपने विश्लेषण में इस खासियत की ओर इशारा किया है. उनके मुताबिक, सामान्य तौर पर बल्लेबाज पहले बल्ला उठाते हैं और फिर उसे नीचे लाकर शॉट के लिए तैयार होते हैं. लेकिन वैभव का तरीका इससे बिल्कुल अलग है.
वैभव पहले बल्ला उठाते हैं- फिर वह थोड़ा नीचे आता है और फिर एक बार फिर ऊपर उठता है. यह 'डबल मूवमेंट' क्रिकेट में बेहद दुर्लभ है, खासकर तब जब कोई युवा बल्लेबाज तेज गेंदबाजों के सामने इस तकनीक के साथ सहज दिखे.
सबसे चौंकाने वाली बात उनका बैट का एंगल है. जब वैभव अपने शॉट की तैयारी में होते हैं, तो उनका बल्ला एक असामान्य दिशा में जाता है- ऐसा लगता है जैसे वह कवर की दिशा की ओर देख रहा हो. इसी एंगल से वह अचानक बल्ले को घुमाते हैं और गेंद पर हमला करते हैं.
आकाश चोपड़ा के मुताबिक, उन्होंने शायद ही कभी किसी बल्लेबाज का बल्ला इस दिशा में जाते देखा हो. यही कारण है कि वैभव की बल्लेबाज को समझना आसान नहीं- क्योंकि वह परंपरागत सीमाओं में बंधी नहीं है.
लेकिन इस तकनीक की असली ताकत सिर्फ एंगल में नहीं, बल्कि उसकी रफ्तार और लचीलेपन में छिपी है.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनकी बल्लेबाजी किसी 'हथौड़े' जैसी नहीं लगती- जहां सिर्फ ताकत दिखाई दे. बल्कि यह एक 'हंटर' की तरह है, जो हवा को चीरते हुए तेजी से चलता है. उनका बल्ला सिर्फ घूमता नहीं, बल्कि लहराता है और फिर एकदम सही समय पर वार करता है.
यही वजह है कि उनके शॉट्स में अलग तरह की ऊर्जा दिखाई देती है.
वैभव की कलाइयों में जबरदस्त ताकत है. उनका बैक हैंड शरीर से थोड़ा दूर रहता है, जिससे उन्हें बॉटम हैंड का पूरा इस्तेमाल करने की आजादी मिलती है. जब बल्ला गेंद से टकराता है, तो उसमें सिर्फ टाइमिंग नहीं, बल्कि कलाइयों की ताकत भी शामिल होती है.
नतीजा साफ है- गेंद सिर्फ जाती नहीं, उड़ती है.
आज के टी20 युग में जहां हर बल्लेबाज छक्के लगाने की कोशिश करता है, वैभव के शॉट्स में सहजता नजर आती है. वह गेंद को 'मारते' नहीं उसे 'लॉन्च' करते हैं. उनके बल्ले का स्विंग ऐसा है कि गेंद खुद-ब-खुद हवा में उठ जाती है और बाउंड्री के पार चली जाती है.
उनकी बल्लेबाजी में एक अनोखी लय है- पहले बैट उठाना, फिर हल्का नीचे लाना, फिर दोबारा उठाना और फिर एक घुमावदार स्विंग के साथ प्रहार करना. यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि गेंदबाज के पास प्रतिक्रिया देने का वक्त ही नहीं होता.
यही वजह है कि वैभव के सामने गेंदबाज अक्सर असहज नजर आते हैं. उन्हें समझ नहीं आता कि गेंद कहां फेंकी जाए, क्योंकि बल्लेबाज़ का मूवमेंट ही पारंपरिक नहीं है. लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात सिर्फ उनकी तकनीक नहीं, बल्कि उनका नजरिया है.
क्रिकेट में तकनीक सिखाई जाती है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी यह साबित करती है कि असली महानता अपनी पहचान बनाने में होती है. उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास झलकता है. यह विश्वास कि उनका तरीका अलग है, लेकिन गलत नहीं.
जब उनका बल्ला तलवार की तरह घूमता है, तो वह सिर्फ रन नहीं बनाता… वह क्रिकेट की परंपराओं को चुनौती देता है और एक नई कहानी लिखता है.
विश्व मोहन मिश्र