न्यू चंडीगढ़ में आज (29 मई) दूसरा क्वालिफायर खेला जाएगा, लेकिन असली मुकाबला गुजरात टाइटन्स (GT) और वैभव सूर्यवंशी के बीच होगा. वह वैभव, जिसने इस सीजन बड़े-बड़े गेंदबाजों को खिलौना बना दिया है. इस रात का सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या गुजरात टाइटन्स इस ‘बेबी बॉस’ को रोक पाएंगे? क्योंकि अगर 'वंडर किड' चल गया, तो राजस्थान रॉयल्स (RR) को तीसरी बार फाइनल का टिकट लेने से कोई नहीं रोक पाएगा.
एलिमिनेटर में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ वैभव ने जो किया, उसने सिर्फ मैच नहीं बदला था, आईपीएल की धड़कन बदल दी थी. 29 गेंदों में 97 रन... यह पारी क्रिकेट की भाषा में सिर्फ विस्फोटक नहीं थी, वह भयावह थी.
पैट कमिंस जैसे विश्वस्तरीय कप्तान और गेंदबाज के खिलाफ लगातार तीन छक्के मारते समय वैभव के चेहरे पर दबाव नहीं था. ऐसा लग रहा था, जैसे कोई बच्चा पार्क में बल्लेबाजी कर रहा हो. कमिंस ने बाउंसर डाली, यॉर्कर डाली, रफ्तार बदली, एंगल बदले... लेकिन वैभव के सामने हर योजना छोटी पड़ती चली गई.
इस सीजन में वैभव सिर्फ रन नहीं बना रहे. वह तेज गेंदबाजों के नाम के आसपास बना डर खत्म कर रहे हैं. जसप्रीत बुमराह से लेकर पैट कमिंस तक, दुनिया के बड़े गेंदबाज उनकी बल्लेबाजी के सामने सामान्य नजर आए हैं.
अब चुनौती गुजरात टाइटन्स के सामने है
मोहम्मद सिराज ने पिछले मुकाबले (9 मई, जयपुर) में शॉर्ट गेंद पर वैभव का विकेट जरूर लिया था... लेकिन मजे के बात है कि उस मैच में वैभव ने उनकी पहली ही गेंद का सामना करते हुए छक्का जड़ा था. कगिसो रबाडा की रफ्तार भी उन्हें रोक नहीं पाई थी. उसी मैच में वैभव ने रबाडा को दो लगातार छक्के जड़े थे. ऐसे में गुजरात के लिए सबसे बड़ी चिंता सिर्फ विकेट नहीं, वैभव की मानसिकता होगी.
15 साल की उम्र में ज्यादातर खिलाड़ी माहौल समझने की कोशिश करते हैं. वैभव माहौल बदल देते हैं. 242.85 की स्ट्राइक रेट, 680 रन और 65 छक्के... यह आंकड़े किसी वीडियो गेम जैसे लगते हैं. लेकिन सबसे खतरनाक बात आंकड़े नहीं हैं. सबसे खतरनाक बात उनका निडर होना है.
वह सिर्फ गेंद देखते हैं... और फिर उसे स्टेडियम के बाहर भेजने की कोशिश करते हैं. उनकी बल्लेबाजी में वीरेंद्र सहवाग जैसी निडरता दिखती है. एबी डिविलियर्स जैसी कल्पना दिखती है. ब्रायन लारा जैसी आजादी दिखती है. लेकिन फिर भी वह किसी की कॉपी नहीं लगते. वह सिर्फ वैभव सूर्यवंशी लगते हैं.
दूसरी ओर गुजरात के पास भी तीसरे आईपीएल फाइनल में पहुंचने का मौका है, जिसे क्वालिफायर-1 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू ने हराया था.
गुजरात की टीम बल्लेबाजी में शीर्ष तीन शुभमन गिल, साइ सुदर्शन और जोस बटलर पर निर्भर है. अगर ये नहीं चले तो बड़ा स्कोर बनना मुश्किल है . अगर रॉयल्स ने 250 से अधिक रन बना लिए तो गिल और सुदर्शन पर दबाव आ जाएगा.
गुजरात के आक्रमण की बात करें तो नई गेंद से सिराज और कगिसो रबाडा जब दौड़ते हैं, तो बल्लेबाज रन कम और बचने के रास्ते ज्यादा सोचता है. सिराज की स्विंग, रबाडा की रफ्तार, जेसन होल्डर की अतिरिक्त उछाल और प्रसिंद्ध की हार्ड लेंथ… यह हमला किसी भी बल्लेबाजी क्रम को सांस लेने तक का मौका नहीं देता. राशिद खान भी अपनी फिरकी से बल्लेबाजों को टेंशन में ला सकते हैं.
...लेकिन वैभव की बल्लेबाजी पर वे कितना अंकुश लगा पाएंगे, यह समय ही बताएगा.
आज न्यू चंडीगढ़ में भीषण गर्मी होगी, लेकिन स्टेडियम में हजारों लोग सिर्फ मैच देखने नहीं आएंगे. वे उस लड़के को देखने आएंगे, जो क्रिकेट की सीमाएं बदलता हुआ नजर आ रहा है. एक दौर था, जब 200 रन असंभव लगते थे. फिर 250 सामान्य हो गया. अब वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज बता रहे हैं कि शायद 300 भी उतना दूर नहीं. उनकी बल्लेबाजी देखकर लगता है कि क्रिकेट धीरे-धीरे नहीं बदल रहा... वह छलांग मार रहा है.
राजस्थान रॉयल्स को फाइनल पहुंचना है. गुजरात टाइटन्स को रोकना है. लेकिन सच यह है कि न्यू चंडीगढ़ में आज सबसे बड़ी लड़ाई राजस्थान और गुजरात के बीच नहीं होगी. सबसे बड़ी लड़ाई होगी- गुजरात टाइटन्स बनाम वैभव सूर्यवंशी.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क