पिछले 15 महीनों में एक कड़वी सच्चाई बार-बार भारत के सामने आई है- स्पिन के खिलाफ असहजता. टेस्ट क्रिकेट में इसकी पहली दरार तब दिखी जब न्यूजीलैंड ने घर में ही भारतीय बल्लेबाजी की तकनीक और धैर्य दोनों को परखा. इसके बाद साउथ अफ्रीका ने, खासकर साइमन हार्मर की ऑफ स्पिन ने... उस कमजोरी को सिर्फ उजागर नहीं किया, बल्कि बेनकाब कर दिया. जो कभी मामूली तकनीकी खामी लगती थी, वह धीरे-धीरे पैटर्न बनती गई. अब वही परछाई टी20 वर्ल्ड कप के मंच पर भी दिखाई दे रही है- फॉर्मेट बदला है, ओवर घटे हैं, लेकिन स्पिन के सामने सवाल अब भी खड़े हैं.
वर्ल्ड कप से ठीक पहले भारत ने साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार दो पांच-पांच मैचों की सीरीज में जो बल्लेबाजी की, वह धमाकेदार थी. 230+ का स्कोर तीन बार (238/7 271/5 231/5), तिरुवनंतपुरम में 271 रन, पावरप्ले में 60+ आम बात और 10 रन प्रति ओवर तो जैसे नियम बन चुका था. अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने गेंदबाजों के मन में खौफ भर दिया था.
...लेकिन टी20 वर्ल्ड कप की तस्वीर बदली हुई है. अमेरिका, नामीबिया, पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के खिलाफ जीत जरूर मिली, लेकिन वे जीतें 'तूफानी बल्लेबाजी' वाली नहीं थीं. पावरप्ले स्कोर- 46/4, 86/1, 52/1, 51/2 और 31/3. यह वही भारत नहीं दिखाता जिसने हाल ही में 270 पार किए थे.
पावरप्ले में ब्रेक क्यों?
कारण साफ हैं, और कठोर भी...
पहला- अभिषेक शर्मा का फॉर्म पूरी तरह ठंडा पड़ जाना. लगातार तीन 'डक'. दिलचस्प यह कि भारत का सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर (86/1) उसी दिन आया जब अभिषेक अस्पताल में थे और संजू सैमसन ने ईशान के साथ ओपनिंग की.
दूसरा- पिचें. यह वे सपाट 'शर्टफ्रंट' विकेट नहीं हैं, जहां गेंद बल्ले पर आती थी. यहां नमी है, चिपचिपाहट है, गेंद रुककर आ रही है, टर्न हो रही है. ऐसे में ऑफ-पेस और स्पिन सोने की खान साबित हुए हैं.
तीसरा- नंबर 3 और 4 की एंट्री पावरप्ले में ही. तिलक वर्मा और सूर्यकुमार यादव जैसे धुरंधर बल्लेबाजों को हालात के मुताबिक खेलना पड़ा. आंकड़े कहते हैं कि तिलक (118.88) और सूर्या (127.65) के स्ट्राइक रेट अपेक्षा से कम हैं.
न्यू बॉल स्पिन: पुरानी रणनीति का नया अवतार
टी20 में पहले छह ओवर आमतौर पर पागलपन के होते हैं- फील्डिंग सर्कल अंदर, नई सख्त गेंद और ओपनर्स के पास खुलकर खेलने का लाइसेंस... लेकिन इस वर्ल्ड कप में विरोधियों ने स्क्रिप्ट बदल दी है.
नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने चार विकेट लेकर शुरुआत की, पाकिस्तान ने सलमान आगा और सैम अयूब से ब्रेक लगाया और अहमदाबाद में नीदरलैंड्स के आर्यन दत्त ने भारतीय टॉप ऑर्डर को जकड़ दिया.
सबसे ताजा उदाहरण साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच में दिखा- एडेन मार्करम ने नई गेंद खुद थामी और पहले ही ओवर में ईशान किशन को शून्य पर चलता कर दिया. यह सिर्फ विकेट नहीं था, यह संदेश था- भारत को रोकना है तो शुरुआत में स्पिन डालो.
अब दो मैच जो भारत को सुपर-8 में खेलने हैं, उसमें - जिम्बाब्वे के पास ऑफ स्पिनर सिकंदर रजा हैं, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नई गेंद ली थी. वेस्टइंडीज के पास रॉस्टन चेस की स्पिन है, जो पावरप्ले में भूमिका निभा सकते हैं.
दाएं हाथ के ऑफ स्पिनरों ने भारत के टॉप ऑर्डर की रफ्तार पर लगाम लगाई है. पांच लेफ्ट-हैंडर्स टॉप सात में होना एक कारण बताया जा रहा है, लेकिन असली फर्क अभिषेक के फ्लॉप रहने से पड़ा है. पहले वे शुरुआती ओवरों में गेंदबाजों का मनोबल तोड़ देते थे; अब विपक्षी आक्रमण साहस के साथ उतर रहा है.
क्या सचमुच संकट है या सिर्फ परिस्थितियों के मुताबिक बदलाव?
यह कहना गलत होगा कि भारत गहरे संकट में है. 209, 175 और 193 जैसे स्कोर ऐसे पिचों पर आए, जहां 15–20 रन कम भी मुकाबले के लिए काफी होते. असल बदलाव सिर्फ अंदाज में है- 'बेखौफ आक्रामकता' की जगह टीम ने हालात के मुताबिक संयमित बल्लेबाजी को प्राथमिकता दी है.
पावरप्ले में उजागर हुई वही 15 महीनों पुरानी दरार अब सिर्फ तकनीकी बहस नहीं रह गई है. उसका सीधा असर भारत के सेमीफाइनल समीकरण पर दिख रहा है. स्पिन के खिलाफ धीमी शुरुआत और बड़ी हार ने नेट रन रेट को चोट पहुंचाई और अब कहानी सिर्फ 'कैसे खेल रहे हैं' की नहीं, बल्कि 'कैसे क्वालिफाई करेंगे” की हो गई है.
- भारत दोनों मैच जीतता है?
अगर भारत अपने बाकी दोनों मुकाबले जीत लेता है तो उसके चार अंक हो जाएंगे, जो सामान्य परिस्थितियों में सेमीफाइनल के लिए काफी होने चाहिए. लेकिन अगर साउथ अफ्रीका एक ही मैच जीते और वेस्टइंडीज बनाम जिम्बाब्वे का विजेता भी उसे हरा दे, तो तीन टीमें चार अंकों पर पहुंच सकती हैं. ऐसे में फैसला नेट रन रेट (NRR) से होगा और यहीं भारत की हालिया हार का असर सामने आएगा. भारत के लिए सबसे सरल स्थिति तब होगी जब साउथ अफ्रीका अपने बाकी दोनों मैच जीत ले, जिससे गणित सीधा हो जाए.
- भारत एक मैच जीतता है?
अगर भारत सिर्फ एक मैच जीतता है तो स्थिति मुश्किल हो जाएगी. उसे साउथ अफ्रीका के बाकी सभी मैच जीतने की उम्मीद करनी होगी. साथ ही उसकी एकमात्र जीत वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता के खिलाफ होनी चाहिए. ऐसी हालत में भारत, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे बराबर अंकों पर आ सकते हैं और फिर फैसला नेट रन रेट से होगा.
यानी पावरप्ले में जो ठहराव दिखा, उसका असर अब अंक तालिका में भी झलक रहा है. टूर्नामेंट इस मोड़ पर है जहां सिर्फ जीत काफी नहीं- दबदबे वाली जीत ही भारत को राहत दे सकती है.
विश्व मोहन मिश्र