भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और 1983 वर्ल्ड कप में विजेता टीम के सदस्य रहे मदन लाल ने टी20 वर्ल्ड कप विवाद पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश को भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार के लिए उकसा रहा है और दोनों देश मिलकर भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.
गौरतलब है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने गुरुवार (22 जनवरी) को ऐलान किया कि वह अपनी टीम को आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारत टीम नहीं भेजेगा. बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने मुकाबलों का वेन्यू बदलने की मांग की थी, जिसे आईसीसी ने औपचारिक रूप से खारिज कर दिया.
इसके बाद बांग्लादेश ने टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया. इंडिया टुडे से एक्सक्लूसिव बातचीत में मदन लाल ने बांग्लादेश के इस फैसले को मूर्खतापूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि इस फैसले से भारत को कोई घाटा नहीं होगा, लेकिन बांग्लादेश को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा.
नुकसान सिर्फ बांग्लादेश को होगा: मदन लाल
मदन लाल ने कहा, 'मुझे लगता है यह एक बेवकूफी भरा फैसला है क्योंकि भारत को इससे कुछ भी नुकसान नहीं होगा. नुकसान सिर्फ बांग्लादेश को होना है. इतने बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेने से व्यावसायिक रूप से बांग्लादेश को भारी घाटा होगा. मुझे लगता है कि पाकिस्तान उन्हें इस टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने के लिए उकसा रहा है. वे सिर्फ भारत को नीचे गिराना चाहते हैं.'
बांग्लादेश को अपने मुकाबले कोलकाता और मुंबई में खेलने थे. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन लाल ने कहा कि ये दोनों शहर भारत के सबसे सुरक्षित शहरों में गिने जाते हैं और सुरक्षा को लेकर कोई सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने कहा, 'वे मुंबई में खेलने वाले थे, जो भारत के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक है. इससे भारतीय क्रिकेट बोर्ड पर कोई फर्क नहीं पड़ता. यह पूरी तरह राजनीति है. पाकिस्तान और बांग्लादेश इसमें अपनी भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि वे भारत को नीचा दिखाना चाहते हैं.'
अगर बांग्लादेश आधिकारिक रूप से टूर्नामेंट से बाहर रहता है, तो स्कॉटलैंड को उसकी जगह टी20 वर्ल्ड कप में शामिल किया जा सकता है. बांग्लादेश को वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, इटली और नेपाल के साथ एक ग्रुप में रखा गया था. मदन लाल का मानना है कि बांग्लादेश के हटने से भारत या बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड) पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह फैसला बांग्लादेश क्रिकेट के लिए लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है.
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