6 लेफ्ट हैंडर्स, 102 गेंदें, गिरते विकेट… क्या ऑफ स्पिन के सामने खुली टीम इंडिया की पोल?

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की बल्लेबाजी के सामने ऑफ स्पिन एक स्पष्ट चुनौती बनकर उभरी है. टॉप ऑर्डर में छह बाएं हाथ के बल्लेबाजों की मौजूदगी का फायदा उठाते हुए विरोधी टीमों ने लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल किया, और...

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ऑफ स्पिन का नासूर! आंकड़े दे रहे हैं खतरे का संकेत... (Photo, PTI) ऑफ स्पिन का नासूर! आंकड़े दे रहे हैं खतरे का संकेत... (Photo, PTI)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:20 PM IST

टी20 क्रिकेट में 6 रन प्रति ओवर अब संघर्ष माना जाता है... लेकिन वर्ल्ड कप के इस मंच पर, भारत ऑफ स्पिन के खिलाफ सिर्फ 6.23 की रफ्तार से रन बना रहा है. 102 गेंदें… गिरते विकेट… और हर विरोधी टीम की रणनीति एक जैसी. सवाल यह नहीं कि ऑफ स्पिन डाली जा रही है- सवाल यह है कि क्या भारत इसके लिए तैयार है?

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कभी-कभी सबसे सीधी रणनीति ही सबसे कारगर होती है. इस टी20 वर्ल्ड कप में भारत के टॉप ऑर्डर की बनावट को देखिए- टॉप 8 में 6 बाएं हाथ के बल्लेबाज. ऐसे में विरोधी टीमों के लिए संदेश साफ था- ऑफ स्पिन डालो, और लगातार डालो. टीमों ने वही किया… और नतीजे भी शानदार रहे.

ग्रुप स्टेज में भारत ने सबसे ज्यादा 102 गेंदें ऑफ स्पिन का सामना किया. जिन 13 टीमों ने कम से कम 6 ओवर ऑफ स्पिन खेले, उनमें भारत की रन गति 6.23 प्रति ओवर रही- जो केवल नेपाल (5.25) और ओमान (5.42) से बेहतर है. बाकी लगभग हर टीम 8 या उससे ऊपर की रफ्तार से रन बना रही है.

सिर्फ रन ही नहीं, विकेट भी गिरे हैं. ऑफ स्पिन के खिलाफ भारत का एवरेज 13.25 रहा- जो इस कमजोरी की गंभीरता को बताता है.

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यह भी सच है कि भारत को ऐसे ऑफ स्पिन स्पेल झेलने पड़े जो किसी भी टीम को परख सकते थे.

- गेरहार्ड इरास्मस (नामीबिया)  ने अलग-अलग रिलीज पॉइंट्स से बल्लेबाजों को उलझाया.
- सैम अयूब और इमरान तारिक (पाकिस्तान) ने विविधताओं से गति तोड़ी.
... और फिर आए आर्यन दत्त (नीदरलैंड्स)- जिनकी रफ्तार और सटीक लाइन-लेंथ ने फर्क पैदा किया.

बुधवार को आर्यन दत्त के 4-0-19-2 के आंकड़े बताते हैं कि गुणवत्ता कितनी अहम है. समान रफ्तार (98-99 किमी/घंटा) से गेंदबाजी करते हुए भी कॉलिन एकरमैन की लेंथ की अस्थिरता भारत को तीन छक्के जड़ने का मौका दे गई. फर्क बस नियंत्रण का था.

पिच भी बनी कहानी का हिस्सा

कोलंबो की धीमी और टर्न लेती पिच से अहमदाबाद की फिसलती सतह पर बदलाव आसान नहीं था. अंडरकट करने वाले दत्त जैसी गेंदबाजी उस स्किडी ट्रैक पर और खतरनाक हो गई. तालमेल बैठाने में भारत को वक्त लगा और उसी दौरान नुकसान भी हुआ.

अभिषेक का ‘ट्रिपल डक’ और मानसिक असर

अभिषेक शर्मा ने वर्ल्ड कप करियर की शुरुआत 0, 0, 0 से की- जिसमें दो बार आक्रामक शॉट खेलते हुए ऑफ स्पिन का शिकार बने. एक बार तो नई गेंद से गेंदबाजी कर रहे सलमान आगा ने चौंका दिया. कभी-कभी ऐसे संयोग भी खेल की दिशा बदल देते हैं.

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सुपर-8 में और बढ़ेगी परीक्षा

भारत के सुपर-8 ग्रुप की हर टीम ने यह पैटर्न नोट कर लिया होगा. नेट्स में नई गेंद से ऑफ स्पिन की तैयारी शुरू हो चुकी होगी.

- साउथ अफ्रीका के पास एडेन मार्करम हैं.

- जिम्बाब्वे के पास सिकंदर रजा हैं, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नई गेंद ली थी.

- वेस्टइंडीज के पास रॉस्टन चेस हैं, जो पावरप्ले में भूमिका निभा सकते हैं.

ये भी पढ़े - T20 वर्ल्ड कप 2026 में सुपर-8 की पिक्चर पूरी तरह साफ, जानें कब-कहां होंगे मुकाबले, देखें पूरा शेड्यूल

संदेश साफ है- तो भारत के खिलाफ ऑफ स्पिन एक हथियार?

नंबर 3 और 4 की पहेली

भारत की लचीलापन वाली नीति हाल में थोड़ी सख्त दिखी है. तिलक वर्मा नंबर 3 और सूर्यकुमार यादव नंबर 4 पर स्थिर दिखे.

तिलक ने ऑफ स्पिन की 31 गेंदों पर 26 रन बनाए. सूर्यकुमार ने 27 गेंदों पर 28 रन और एक बार आउट हुए.

सीधा समाधान दिखता है- दोनों की जगह बदल दो. लेकिन मामला इतना सरल नहीं.

पावरप्ले में तेज गेंदबाजी के खिलाफ तिलक ने 41 गेंदों पर 62 रन बनाए, जबकि सूर्यकुमार ने 26 पर 29. हालांकि 10 ओवरों के बाद सूर्यकुमार की रफ्तार 10 से ऊपर और तेज गेंदबाजी के खिलाफ 15+ प्रति ओवर रही.

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यानी टीम शायद तिलक को शुरुआती जोखिम लेने वाला बल्लेबाज मानती है, जबकि सूर्यकुमार को ‘फिनिशिंग एक्सेलरेटर’ की भूमिका में देखती है.

क्या यह वाकई संकट है?

भारत ऑफ स्पिन के खिलाफ जूझा है- यह साफ है. लेकिन क्या यह इतनी बड़ी समस्या है कि रणनीति बदली जाए?

टीम अब तक अन्य सभी पहलुओं में मैचों पर हावी रही है. और दिलचस्प बात यह है कि टी20 क्रिकेट में शुद्ध ऑफ स्पिनर अब दुर्लभ हो चुके हैं- अधिकतर पार्ट-टाइमर या बैटिंग ऑलराउंडर ही यह भूमिका निभा रहे हैं.

फिलहाल भारत अपनी मूल रणनीति से हटता नहीं दिखता. लेकिन अगर सुपर-8 में भी ऑफ स्पिन ने जकड़ लिया...तो शायद नई सोच, नया प्रयोग और नई बल्लेबाजी क्रम देखने को मिले. फिलहाल सवाल कायम है- क्या ऑफ स्पिन भारत की असली परीक्षा बनने जा रही है?
 

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