रविवार की रात अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम जब 'दुबे-दुबे' के नारों से गूंज रहा था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कुछ ही घंटों बाद वही खिलाड़ी, जिसने भारत को टी20 वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई, चुपचाप एक ट्रेन की थर्ड एसी बोगी की ऊपरी बर्थ पर रेलवे के भूरे कंबल में खुद को छिपाकर मुंबई की यात्रा कर रहा होगा.
भारतीय टीम के इस ‘लास्ट एक्शन हीरो’ शिवम दुबे के लिए टी20 वर्ल्ड कप का अंत उतना ही असाधारण था, जितना उनका प्रदर्शन.
आखिरी ओवर में आतिशबाजी
फाइनल में दुबे ने वही किया जिसके लिए उन्हें टीम में चुना गया था- अंतिम ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी.
भारतीय पारी के 20वें ओवर में लंबे कद के इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने तीन चौके और दो छक्के जड़ दिए. उनकी इन ताबड़तोड़ गेंदों ने भारत का स्कोर 250 के पार पहुंचा दिया और न्यूजीलैंड की पहुंच से लगभग बाहर कर दिया.
पूरे टूर्नामेंट में दुबे की भूमिका स्पष्ट थी. मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए थे -
बल्लेबाजी करते समय रनरेट कभी गिरने नहीं देना और गेंदबाजी में रन रोकने की जिम्मेदारी निभाना.
दुबे ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 235 रन बनाए, औसत 39 और स्ट्राइक रेट 169 रहा. उनके बल्ले से 17 छक्के और 15 चौके निकले. फाइनल में उनका 8 गेंदों पर 26 रन का कैमियो निर्णायक साबित हुआ.
... जब वर्ल्ड कप हीरो ने पकड़ी ट्रेन
'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, मैच खत्म होने के बाद अहमदाबाद से मुंबई की सारी उड़ानें भरी हुई थीं. ऐसे में दुबे ने एक ऐसा फैसला किया, जिसकी कल्पना भी कम लोग करेंगे- उन्होंने ट्रेन से घर लौटने का निर्णय लिया.
दुबे ने बताया,'कोई फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी, इसलिए मैंने सुबह की ट्रेन से मुंबई जाने का फैसला किया. सड़क से भी जा सकते थे, लेकिन...'
उनके साथ पत्नी अंजुम और एक दोस्त भी थे. मगर सबसे बड़ी चिंता थी पहचान छिपाने की.
दुबे कहते हैं,'हमने 3rd AC के टिकट बुक किए. घरवाले और दोस्त सभी चिंतित थे- अगर स्टेशन या ट्रेन में किसी ने पहचान लिया तो क्या होगा?'
पहचान छिपाने की पूरी रणनीति
दुबे ने खुद को पहचान से बचाने के लिए पूरा इंतजाम किया. सिर पर कैप,चेहरे पर मास्क और फुल स्लीव टी-शर्ट
सुबह 5:10 बजे की ट्रेन होने के कारण उन्हें उम्मीद थी कि प्लेटफॉर्म पर ज्यादा भीड़ नहीं होगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ- कई क्रिकेट प्रशंसक अब भी भारतीय टीम की जर्सी पहने जश्न के माहौल में थे.
ऐसे में दुबे ने योजना बदल दी.
'मैंने पत्नी से कहा कि मैं ट्रेन छूटने से पांच मिनट पहले तक कार में ही इंतजार करूंगा और फिर तेजी से ट्रेन में चढ़ जाऊंगा.'
टीटी से सामना… और चतुर जवाब
ट्रेन में चढ़ते ही दुबे सीधे अपनी ऊपरी बर्थ पर पहुंच गए. तभी टिकट चेकर आया.
टिकट देखते हुए उसने पूछा- 'शिवम दुबे? वो कौन है, क्रिकेटर?'
पत्नी अंजुम ने तुरंत जवाब दिया, 'नहीं-नहीं, वो यहां कहां से आएगा?'
टीटी आगे बढ़ गया और दुबे की पहचान सुरक्षित रह गई.
लंबे टूर्नामेंट और जश्न की थकान के बाद दुबे ने ज्यादातर समय सोकर बिताने की कोशिश की. उन्होंने बताया, 'रात में एक बार वॉशरूम जाने के लिए नीचे उतरा, लेकिन किसी ने पहचान नहीं पाया.' हालांकि उन्हें सबसे ज्यादा चिंता बोरीवली स्टेशन पर उतरने की थी, क्योंकि तब तक दिन निकल चुका होता.
पुलिस एस्कॉर्ट के साथ घर वापसी
अंततः दुबे ने पुलिस से मदद मांगी. दुबे ने हंसते हुए कहा, 'पुलिस को लगा कि मैं एयरपोर्ट से आ रहा हूं. जब मैंने बताया कि ट्रेन से सफर कर रहा हूं तो वे भी हैरान रह गए. उन्होंने एस्कॉर्ट दिया, इसलिए स्टेशन से बाहर निकलना आसान हो गया.'
स्टेडियम में लाखों लोगों की तालियों के बीच ट्रॉफी उठाने वाला खिलाड़ी कुछ ही घंटों बाद ट्रेन की ऊपरी बर्थ पर चुपचाप सो रहा था- यह दृश्य भारतीय क्रिकेट की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक बन गया.
शायद यही खेल की खूबसूरती भी है- जहां मैदान पर हीरो बनने वाला खिलाड़ी, मैदान के बाहर भी सादगी और परिवार के प्रति लगाव से लोगों का दिल जीत लेता है.
और दुबे के लिए उस सुबह की सबसे बड़ी ट्रॉफी शायद वर्ल्ड कप नहीं, बल्कि मुंबई में अपने चार साल के बेटे अयान और दो साल की बेटी मेहविश से मिलने की खुशी थी.
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