IPL 2026: दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ हरी जर्सी पहनकर क्यों उतरी RCB? जानें इसके पीछे का खास कारण

दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ आईपीएल 2026 के मुकाबले में बेंगलुरु की टीम लाल की बजाय हरी जर्सी में नजर आई. दरअसल यह हरी जर्सी कोई स्टाइल स्टेटमेंट नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी आरसीबी की खास पहल का हिस्सा है.

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रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की हरी जर्सी कचरे से बनाई गई है. (Photo: BCCI) रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की हरी जर्सी कचरे से बनाई गई है. (Photo: BCCI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • बेंगलुरु,
  • 18 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:29 PM IST

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में  दिल्ली कैपिटल्स (DC) के खिलाफ मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाड़ी खास ग्रीन जर्सी में दिखे. यह सिर्फ जर्सी का रंग बदलने भर की बात नहीं है, बल्कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की उस 'गो ग्रीन' इनिशिएटिव का हिस्सा है, जिसे फ्रेंचाइजी 2011 से लगातार आगे बढ़ा रही है.

18 अप्रैल (शनिवार) को एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ग्रीन जर्सी ने एक बार फिर सभी का ध्यान खींचा. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 2011 से हर सीजन में एक मैच ग्रीन जर्सी में खेलती आ रही है, लेकिन इस बार फ्रेंचाइजी ने साफ कर दिया है कि यह पहल सिर्फ एक प्रतीकात्मक अभियान नहीं है, बल्कि पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक बड़ा और गंभीर कदम है.

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इस ग्रीन जर्सी को रिसाइकल्ड मटेरियल से तैयार किया गया है. इसका मकसद यह दिखाना है कि खेल और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का दावा है कि वह दुनिया की पहली कार्बन-न्यूट्रल टी20 फ्रेंचाइजी है और अब उसका अगला लक्ष्य कार्बन-पॉजिटिव बनना है.

ये पूरा अभियान पर्यावरण को समर्पित
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के सीईओ राजेश मेनन ने कहा कि ग्रीन जर्सी उनकी सालों की मेहनत और पर्यावरण के लिए की गई प्रतिबद्धता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह पहल सिर्फ टीम तक सीमित नहीं है, बल्कि फैन्स और सभी हितधारकों को भी जिम्मेदार और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश है.

इस बार रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपने ग्रीन अभियान को और ज्यादा मजबूत और डेटा आधारित बनाया है. फ्रेंचाइजी मैच के दिन होने वाले कार्बन उत्सर्जन को मापने के लिए स्टेडियम के अलग-अलग हिस्सों में सर्वे कर रही है. इसके जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि कितने लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से स्टेडियम आते हैं, कितने लोग कार-पूलिंग करते हैं और एक मैच के दौरान कितना कार्बन फुटप्रिंट बनता है.

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फ्रेंचाइजी ने फैन्स को भी इस पहल से जोड़ने के लिए खास व्यवस्था की है. मैच टिकट के जरिए बेंगलुरु मेट्रो में सफर की सुविधा दी जा रही है, ताकि लोग निजी गाड़ियों की बजाय मेट्रो का इस्तेमाल करें. इससे ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों को कम करने में मदद मिलेगी. स्टेडियम के अंदर भी कचरे को अलग-अलग तरीके से मैनेज करने, प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने और बिजली की खपत को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है.

इसके अलावा टीम के ट्रैवल, होटल स्टे, बिजली के इस्तेमाल और डीजल जनरेटर से होने वाले उत्सर्जन का भी रिकॉर्ड रखा जा रहा है. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने यह भी बताया कि पूरे सीजन के दौरान ऐसे सस्टेनेबिलिटी ऑडिट किए जाएंगे और बाद में इन सभी आंकड़ों को एक विस्तृत रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा. इसके बाद उस रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी.

इस तरह देखा जाए तो रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ग्रीन जर्सी सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं है. यह उस बड़े अभियान का चेहरा है, जिसमें रिसाइकल्ड मटेरियल, कार्बन ट्रैकिंग और फैन्स की भागीदारी शामिल है. हर साल की तरह इस बार भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ग्रीन जर्सी सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के संदेश के लिए भी चर्चा में है.

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