इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का प्रदर्शन अब तक काफी खराब रहा है. पांच बार की आईपीएल चैम्पियन टीम ने लगातार तीन मुकाबले गंवा दिए हैं और सीजन की शुरुआत में ही उसकी मुश्किलें बढ़ चुकी हैं. सीएसके का एक फैसला भी लगातार चर्चा में बना हुआ है. टीम ने मिनी ऑक्शन में प्रशांत वीर पर 14.20 करोड़ रुपये की भारी बोली लगाई थी, लेकिन उनका सही से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.
पंजाब किंग्स (PBKS) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ मुकाबलों में प्रशांत वीर प्लेइंग इलेवन का हिस्सा तो रहे, लेकिन उनसे एक भी ओवर की गेंदबाजी नहीं कराई गई. प्रशांत को एक ऐसे ऑलराउंडर के रूप में खरीदा गया, जो टीम को बैलेंस और लचीलापन दे सके. बाएं हाथ के ऑलराउंडर प्रशांत को रवींद्र जडेजा का विकल्प बताया जा रहा था. यही वजह थी कि चेन्नई सुपर किंग्स ने उन पर बड़ा निवेश किया. लेकिन मौजूदा हालात में उन्हें सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे टीम की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं.
दो मैचों में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा रहने के बावजूद प्रशांत वीर से गेंदबाजी नहीं कराना इस बात का संकेत देता है कि टीम उनके दूसरे स्किल पर भरोसा नहीं कर रही है. अगर प्रशांत से गेंदबाजी नहीं करानी थी, तो फिर उन्हें ऑलराउंडर के रूप में इतनी बड़ी रकम देकर क्यों खरीदा गया. आंकड़ों के नजरिए से देखें तो यह और भी चौंकाने वाला है.
हर मैच की वैल्यू 1 करोड़!
14.2 करोड़ रुपये की कीमत को 14 लीग मैचों में बांटें, तो प्रति मैच उनकी वैल्यू लगभग 1.01 करोड़ रुपये बैठती है. अगर इसे बल्लेबाजी और गेंदबाजी में बराबर बांटें, तो हर मैच में करीब ₹50 लाख की गेंदबाजी वैल्यू सीएसके बिना इस्तेमाल के छोड़ रही है. दो मैचों में यह आंकड़ा लगभग 1 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है.
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टी20 क्रिकेट में स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर का महत्व सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह टीम को रणनीतिक बढ़त भी देता है. ऐसा खिलाड़ी कप्तान को अतिरिक्त विकल्प देता है. लेकिन जब इस विकल्प का इस्तेमाल ही नहीं किया जाता, तो टीम कॉम्बिनेशन पर भी असर पड़ता है.
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इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि चेन्नई सुपर किंग्स के भीतर प्रशांत वीर की भूमिका को लेकर स्पष्टता की कमी है. या तो टीम उनकी गेंदबाजी पर भरोसा नहीं कर रही या फिर उन्हें मुख्य रूप से बल्लेबाजी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना है. दोनों ही स्थितियां टीम की रणनीति पर सवाल खड़े करती हैं.
प्रशांत वीर का मामला चेन्नई सुपर किंग्स के लिए सिर्फ एक खिलाड़ी के इस्तेमाल का नहीं, बल्कि टीम कॉम्बिनेशन और रणनीतिक सोच की दिशा का संकेत बन गया है. आने वाले मैचों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएसके प्रशांत वीर का पूरा उपयोग करती है या यह निवेश यूं ही अधूरा रह जाता है.
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