आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) एक बार फिर अपने बड़े निवेश को लेकर चर्चा में है. IPL 2026 ऑक्शन में फ्रेंचाइजी ने कार्तिक शर्मा और प्रशांत वीर पर पैसों की बारिश कर दी. चेन्नई ने दोनों पर 14.20-14.20 करोड़ रुपये खर्च किए. इस तरह CSK ने दो युवा खिलाड़ियों पर कुल 28.40 करोड़ रुपये लगा दिए, जिससे यह साफ है कि फ्रेंचाइजी इस बार भविष्य पर बड़ा दांव खेल रही है. युवाओं पर यह बड़ा दांव भविष्य की रणनीति का संकेत देता है, लेकिन टीम का रिकॉर्ड बताता है कि चेन्नई के लिए महंगे खिलाड़ी हमेशा फायदे का सौदा नहीं रहे हैं.
CSK की पहचान लंबे समय तक अनुभवी खिलाड़ियों की टीम यानी 'डैड्स आर्मी' के रूप में रही. इस बार टीम ने युवाओं पर भरोसा जताया है. हालांकि, पहले का रिकॉर्ड बताता है कि ऐसे खिलाड़ियों को हमेशा ज्यादा मौके नहीं मिल पाते. महंगे खिलाड़ियों के साथ CSK का उतार-चढ़ाव भरा सफर काफी पुराना है. एंड्रयू फ्लिनटॉफ से शुरू हुई यह कहानी कई बार चोट, फॉर्म और टीम संयोजन के कारण प्रभावित होती रही.
एंड्रयू फ्लिनटॉफको 1.55 मिलियन डॉलर में खरीदने के बाद से ही चेन्नई सुपर किंग्स का महंगे खिलाड़ियों के साथ रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है. अगर भरोसा न हो, तो हर सीजन में उनके सबसे महंगे खिलाड़ी के प्रदर्शन पर नजर डालना ही काफी है.
2012 के ऑक्शन में रवींद्र जडेजा करीब 2 मिलियन डॉलर में CSK के सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल थे. उस सीजन उनका प्रदर्शन मिला-जुला रहा. बल्लेबाजी में उनका एवरेज 15 और स्ट्राइक रेट 126.49 रहा, जो गिरावट दिखाता है.
हालांकि गेंदबाजी में उन्होंने 12 विकेट लिए और अपने IPL करियर का इकलौता पांच विकेट भी लिया, लेकिन उनकी इकॉनमी 7.8 रही, जो पहले के सीजनों (6.47 और 7.26) से ज्यादा थी. यानी विकेट जरूर मिले, लेकिन गेंदबाजी पहले जितनी किफायती नहीं रही.
महंगे खिलाड़ियों में कुछ अपवाद भी रहे और उनमें सबसे बड़ा नाम क्रिस मॉरिस का है. 2013 में चैम्पियंस लीग T20 में शानदार प्रदर्शन के बाद CSK ने उन्हें करीब 6.25 लाख डॉलर में खरीदा और उन्होंने इस भरोसे को सही साबित किया.
मॉरिस ने उस सीजन में 15 विकेट लेकर चेन्नई के गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती दी और टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. उनकी इकॉनमी 8.02 रही, जो उनके IPL करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा.
दिलचस्प बात यह है कि मॉरिस ने अपने IPL करियर में सिर्फ एक बार और 15 विकेट लिए. वह 2021 का सीजन था, लेकिन तब उनकी इकॉनमी बढ़कर 9.17 हो गई थी. यानी 2013 में उन्होंने न सिर्फ विकेट लिए, बल्कि असरदार प्रदर्शन भी किया, जो CSK के महंगे खिलाड़ियों के रिकॉर्ड में एक अपवाद माना जाता है.
फाफ डु प्लेसिस ने 2012 में CSK के लिए शानदार प्रदर्शन किया था. 2014 में जब उन्हें 4.75 करोड़ रुपये में खरीदा गया, तो वह टीम के सबसे महंगे खिलाड़ी बने. हालांकि, उस सीजन में उनका प्रदर्शन थोड़ा गिरा- औसत 33 से घटकर 27.54 और स्ट्राइक रेट 131 से 128.9 हो गया. यानी फाफ का प्रदर्शन न बहुत खराब रहा, न ही बहुत खास.
लेकिन 2015 में यह ट्रेंड और साफ दिखा. माइकल हसी और इरफान पठान को 1.5-1.5 करोड़ रुपये में खरीदा गया, पर टीम को खास फायदा नहीं मिला. पठान को एक भी मैच नहीं मिला, जबकि हसी सिर्फ चार मैच खेल पाए, जिसमें उन्होंने 77 रन बनाए (औसत 19, स्ट्राइक रेट 110).
उस समय ड्वेन स्मिथ और ब्रेंडन मैक्कुलम की आक्रामक बल्लेबाजी के चलते हसी को ज्यादा मौके नहीं मिले और प्लेऑफ में मिले सीमित मौके में भी वह प्रभाव नहीं छोड़ सके.
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दो साल के बैन के बाद चेन्नई सुपर किंग्स ने 2018 में वापसी की और केधार जाधव को 7.8 करोड़ रुपये में खरीदा. पहले ही मैच में जाधव चोटिल हो गए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अहम पारी खेलकर टीम को मुंबई इंडियंस के खिलाफ रोमांचक जीत दिलाई.
2019 में मोहित शर्मा 5 करोड़ में टीम में लौटे, लेकिन उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला. उस मैच में एक विकेट लेने के बाद भी उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला.
2020 में पीयूष चावला को 6.75 करोड़ में खरीदा गया, लेकिन उनका भी पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया. सात मैचों में उन्होंने 6 विकेट लिए, लेकिन उनकी इकॉनमी 9 से ऊपर रही, जो उम्मीदों के मुताबिक नहीं थी.
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2022 में दीपक चाहर को 14 करोड़ रुपये में खरीदा गया, लेकिन चोट के कारण वह पूरा सीजन नहीं खेल सके. यानी लगातार दो सीजन, दो बड़े खिलाड़ी और एक भी मैच नहीं.
2023 में बेन स्टोक्स को 16.25 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जो उस समय CSK का सबसे महंगा सौदा था. हालांकि वह सिर्फ दो मैच ही खेल सके, जिसमें 15 रन बनाए और एक भी विकेट नहीं ले पाए. दिलचस्प यह रहा कि उनके रन भी उनकी बोली की रकम के करीब नहीं पहुंच सके.
2024 में डेरिल मिचेल को 14 करोड़ रुपये में खरीदा गया, लेकिन वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके. उन्होंने 318 रन बनाए (औसत 28.91, स्ट्राइक रेट 142.6), जो ठीक-ठाक तो था, लेकिन बड़े दाम के हिसाब से खास प्रभाव नहीं छोड़ पाया.
हालांकि 2025 में नूर अहमद ने उम्मीद जरूर जगाई. 10 करोड़ रुपये में खरीदे गए नूर ने 24 विकेट लिए और 8.16 की इकॉनमी से गेंदबाजी की, जिससे लगा कि यह सिलसिला बदल सकता है.
पिछले करीब 13 सालों में चेन्नई अपने महंगे खिलाड़ियों का पूरा फायदा नहीं उठा पाई है. कभी चोट, कभी खराब फॉर्म और कभी टीम कॉम्बिनेशन... इन सबने निवेश का असर कम किया है. अब युवाओं पर लगाए गए नए दांव से उम्मीद है कि टीम इस ट्रेंड को बदल पाएगी.
पिछले एक दशक से अधिक समय का रिकॉर्ड यही संकेत देता है कि CSK के महंगे खिलाड़ी या तो चोट या फॉर्म, या टीम कॉम्बिनेशन की वजह से अपेक्षित योगदान नहीं दे पाए हैं. ऐसे में IPL 2026 में युवाओं पर किया गया निवेश टीम के लिए बड़ा मौका भी है और चुनौती भी. अब देखना होगा कि यह नई रणनीति चेन्नई की किस्मत बदल पाती है या नहीं.
सिद्धार्थ विश्वनाथन