Indian World Cup Squad: भारत की मेजबानी में इसी साल होने वाले आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2023 के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है. इस टीम में चोट के बाद वापसी कर रहे केएल राहुल और जसप्रीत बुमराह को भी जगह मिली है.
वर्ल्ड कप की इस भारतीय टीम से कई लोग संतुष्ट हैं, तो कई दिग्गजों ने आलोचनाएं भी की हैं. कप्तान रोहित शर्मा ने तो यह तक कह दिया है कि हर बार कोई ना कोई प्लेयर छूट जाता है. हर बार सभी को खुश नहीं कर सकते. 15 खिलाड़ी चुनने होते हैं. इसमें कई अच्छे प्लेयर को बाहर भी करना पड़ता है.
10 सालों से नहीं जीते आईसीसी खिताब
कप्तान और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की लाख दलील के बावजूद आलोचक हैं कि उनकी बात से सहमत नजर नहीं आ रहे हैं. मगर इस स्क्वॉड का एक एनालिसिस हमने भी किया है, जिसमें 3 बड़ी खामियां पाई हैं. बता दें कि भारतीय टीम ने 10 सालों से कोई आईसीसी खिताब नहीं जीता है.
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भारतीय टीम ने आखिरी ICC खिताब जून 2013 में जीता था. तब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में चैम्पियंस ट्रॉफी अपने नाम की थी. इस बार वर्ल्ड कप भारत में ही हो रहा है. मगर भारतीय टीम में 3 बड़ी कमियां देखी जा रही हैं. यदि टूर्नामेंट में यह कमियां सामने आईं, तो यह आईसीसी खिताब भी हाथ से जाने का डर सता रहा है. आइए जानते हैं इन कमियों के बारे में....
टॉप-4 में कोई लेफ्ट हैंड बैटर नहीं
15 सदस्यीय भारतीय टीम में सिर्फ 4 ही लेफ्ट हैंड बल्लेबाजों ईशान किशन, रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल और कुलदीप यादव को शामिल किया गया है. मगर देखने वाली बात यह है कि यह सभी मिडिल ऑर्डर और उसके नीचे बैटिंग करने आते हैं. ईशान ओपनिंग कर सकते हैं, मगर उन्हें मिडिल ऑर्डर में 5वें नंबर पर खिलाने की गुंजाइश ज्यादा दिख रही है.
यदि ईशान की जगह बतौर विकेटकीपर केएल राहुल को मौका मिला तो समझ लीजिए कि टॉप-6 तक कोई लेफ्ट हैंडर नहीं होगा. जबकि जडेजा 7वें नंबर पर बैटिंग करते हैं. दूसरी ओर पिछले कुछ समय में देखा गया है कि भारत का टॉप ऑर्डर लेफ्ट आर्म तेज गेंदबाज के सामने ज्यादा मुश्किल में नजर आता है. ऐसे में भारतीय टीम को इस वर्ल्ड कप में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. बता दें कि 2011 की भारतीय टीम के पास टॉप ऑर्डर में गौतम गंभीर और युवराज सिंह लेफ्ट हैंडर थे.
ऑफ स्पिनर की कमी
भारतीय टीम में दो ऑलराउंडर समेत कुल तीन स्पिनर्स हैं. ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल हैं. जबकि स्पेशलिस्ट स्पिनर कुलदीप यादव हैं. खास बात ये है कि तीनों ही लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं. इनमें अकेले कुलदीप कलाई के स्पिनर हैं, जिन्हें चाइनामैन बॉलर कहते हैं. टीम में कोई ऑफ स्पिनर नहीं है. ऑफ स्पिनर में रविचंद्रन अश्विन और वॉशिंगटन सुंदर दावेदार थे.
पिछली बार जब भारतीय टीम ने 2011 वर्ल्ड कप खिताब जीता था, तब हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन के रूप में दो ऑफ स्पिनर टीम में थे. भारत के स्पेशलिस्ट बल्लेबाजों में केवल रोहित शर्मा ही ऐसे हैं जो ऑफ स्पिन करा सकते हैं. लेकिन उन्हें बॉलिंग किए लंबा अरसा गुजर चुका है.
बाएं हाथ का पेसर नहीं
भारतीय बोर्ड ने अपनी स्क्वॉड में बतौर स्पेशलिस्ट तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, मोहम्मद शमी और शार्दुल ठाकुर को रखा है. जबकि हार्दिक पंड्या तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हैं. ये चारों ही राइट आर्म पेसर हैं. ऐसे में भारतीय टीम को लेफ्ट आर्म पेसर की कमी काफी ज्यादा खल सकती है. दूसरी ओर बाकी सभी बड़ी टीमों के पास कम से कम एक लेफ्ट आर्म पेसर जरूर है.
लेफ्ट आर्म पेसर एक अलग ही एंगल से गेंदबाजी करते हैं. ऐसे में वो हमेशा ही विपक्षी टीम के लेफ्ट आर्म बैटर को परेशान करते हैं. लेफ्ट आर्म पेसर जब अपनी बॉल को अंदर की तरफ लाते हैं तो बल्लेबाजों के आउट होने की संभावनाएं बढ़ जाती है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान के पेसर शाहीन शाह आफरीदी को देख सकते हैं.
भारतीय टीम में बतौर लेफ्ट आर्म पेसर अर्शदीप सिंह बेहतर ऑप्शन हो सकते थे, मगर वो शुरुआत से ही बीसीसीआई के प्लान में नहीं थे. 2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम को देखेंगे तो उसमें लेफ्ट आर्म पेसर जहीर खान और आशीष नेहरा मौजूद थे. उन्होंने विपक्षी टीम को ढेर करने में अहम भूमिकाएं निभाई थीं.
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