लेफ्ट, राइट, लेफ्ट..? सही शुरुआत के लिए संजू सैमसन क्यों जरूरी

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की लेफ्ट-हैंड क्रांति उसकी ताकत के साथ-साथ कमजोरी भी बनती दिख रही है. टॉप ऑर्डर में लगातार बाएं हाथ के बल्लेबाजों के कारण विरोधी टीमों ने नई गेंद से ऑफ-स्पिन की स्पष्ट रणनीति अपनाई, जिसका असर शुरुआती विकेटों के रूप में दिखा.

Advertisement
संजू सैमसन को मिलेगा मौका? (Photo, PTI) संजू सैमसन को मिलेगा मौका? (Photo, PTI)

अक्षय रमेश

  • चेन्नई,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:12 PM IST

पिछले कुछ वर्षों तक भारतीय व्हाइट-बॉल क्रिकेट में एक ही शिकायत बार-बार दोहराई जाती थी- टॉप ऑर्डर में दाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार. गेंदबाजों के लिए एंगल एक जैसे, फील्ड सेट एक जैसी, और रणनीति भी लगभग तय. तब टीम प्रबंधन के भीतर यह सोच बनी कि लय तोड़ने, लाइन बिगाड़ने और विरोधियों को असहज करने के लिए बाएं हाथ के बल्लेबाज जरूरी हैं.

Advertisement

आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. भारत ने सिर्फ लेफ्ट-हैंडर्स को जोड़ा नहीं, बल्कि पूरी बल्लेबाजी पहचान उनके इर्द-गिर्द खड़ी कर दी. लेकिन 2026 टी20 वर्ल्ड कप में यही ताकत एक छिपी कमजोरी बनती दिख रही है.

2022 वर्ल्ड कप में टॉप-6 में केवल एक बाएं हाथ का बल्लेबाज था. 2024 तक यह संख्या तीन हो गई. मौजूदा टूर्नामेंट में तो बदलाव चरम पर है- दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टॉप-6 में पांच लेफ्ट-हैंडर्स, पाकिस्तान के खिलाफ टॉप-8 में छह बाएं हाथ के बल्लेबाज.

यह संयोग नहीं था, यह सुनियोजित रणनीति...

अभिषेक शर्मा और ईशान किशन इस नए टेम्पलेट के चेहरे बने- पावरप्ले में आक्रामक, निडर और मैच छीन लेने की क्षमता वाले. लेकिन टॉप ऑर्डर को इस हद तक एकतरफा बनाकर भारत ने अनजाने में रणनीतिक एकरसता भी पैदा कर दी. विरोधी टीमों को अब कमजोरियां खोजने की जरूरत नहीं रही. उन्हें पता है- नई गेंद से ऑफ-स्पिन डालो, बाहर की लाइन पर गेंद रखो, और धैर्य रखो.

Advertisement

... जहां से कहानी बदली

विडंबना यह है कि यह मूल योजना नहीं थी. वर्ल्ड कप से ठीक पहले तक संजू सैमसन ही नियमित ओपनर थे. उन्होंने अभिषेक के साथ मजबूत साझेदारी बनाई थी.

लेकिन जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खराब फॉर्म और घरेलू क्रिकेट में ईशान किशन के शानदार प्रदर्शन ने समीकरण बदल दिया. टीम ने फॉर्म को प्राथमिकता दी- किशन अंदर, सैमसन बाहर.

द्विपक्षीय सीरीज में यह दांव चला, लेकिन वर्ल्ड कप के दबाव और धीमी पिचों पर तस्वीर अलग निकली.

चेतावनी के संकेत

पहला झटका नामीबिया के गेरहार्ड इरासमस ने दिया, जिन्होंने दिखाया कि धीमी पिच पर शुरुआती स्पिन भारत को अस्थिर कर सकती है. फिर पाकिस्तान के सलमान अली आगा ने कोलंबो में पहले ही ओवर में ऑफ-स्पिन से अभिषेक को आउट कर दिया. नीदरलैंड्स के आर्यन दत्त ने पावरप्ले में दोनों ओपनर्स को पवेलियन भेजा.

सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्करम ने अहमदाबाद में नई गेंद से स्पिन खोलकर किशन को आउट किया. 188 रनों का पीछा करते हुए भारत 76 रनों से हार गया.

यह कोई आकस्मिक पैटर्न नहीं था- यह रणनीतिक हमला था.

आंकड़े जो कहानी कहते हैं

इस टूर्नामेंट में भारत ने 19 विकेट स्पिन के खिलाफ गंवाए हैं, जिनमें 12 ऑफ-ब्रेक पर. ओपनिंग साझेदारी- पांच मैचों में कुल 34 रन. 20 टीमों में सबसे कम.

Advertisement

जिस टीम की पहचान आक्रामक शुरुआत और 250+ स्कोर से बनी हो, उसके लिए यह आंकड़ा बहुत कुछ कह देता है. भारत ने अपने टी20 इतिहास में चार बार 250+ स्कोर बनाया है, जिनमें से तीन मौजूदा नेतृत्व में आए.लेकिन वर्ल्ड कप की पिचें अलग जानवर होती हैं- ग्रिप, बड़ा मैदान, और कम मार्जिन.

दिलचस्प बात यह है कि व्यक्तिगत स्तर पर बाएं हाथ के बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ कमजोर नहीं हैं. अभिषेक का करियर औसत स्पिन के खिलाफ 48 है. किशन का 37.29. तिलक वर्मा का भले कम (22.45) हो, लेकिन मिडिल ओवर्स में वे कुशल खिलाड़ी हैं.

फिर भी इस टूर्नामेंट में एक मानसिक ब्लॉक दिख रहा है- ऑफ-स्पिन की शुरुआत और दबाव.

जिम्बाब्वे के ऑलराउंडर रयान बर्ल ने भी स्वीकार किया कि भारत के खिलाफ ऑफ-स्पिन रणनीति अब सार्वजनिक रहस्य है. चेन्नई में मुकाबले से पहले उन्होंने कहा कि उनकी टीम इस पैटर्न से पूरी तरह वाकिफ है.

क्या सैमसन समाधान हैं?

बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने माना कि टीम इस रणनीतिक पैटर्न पर चर्चा कर रही है. सैमसन का स्पिन के खिलाफ औसत भले 22.53 हो, लेकिन एक अहम तथ्य छिपा है- पूरे करियर में वे ऑफ-स्पिनर से केवल दो बार आउट हुए हैं.

सबसे महत्वपूर्ण बात- उनकी मौजूदगी बल्लेबाजी क्रम की एकरसता तोड़ती है. दाएं हाथ के बल्लेबाज के रूप में वे एंगल बदलते हैं, फील्ड बदलने पर मजबूर करते हैं और गेंदबाजों की शुरुआती योजना को बाधित करते हैं.

Advertisement

जनवरी में उनका बाहर होना फॉर्म की वजह से था. अब वापसी होगी तो वह टीम संतुलन के लिए एक रणनीतिक फैसला होगा.

भारत की लेफ्ट-हैंड क्रांति ने टीम को विस्फोटक बनाया है... लेकिन अगर यह क्रांति विरोधियों के दाएं हाथ के जाल में फंसने लगे, तो एक ‘राइट’ विकल्प ही ‘लेफ्ट’ समस्या का हल बन सकता है. शायद सही शुरुआत के लिए भारत को फिर से संतुलन की ओर लौटना होगा- लेफ्ट, राइट और फिर आक्रामकता.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement