केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेल संबंधों पर लगे प्रतिबंध को जारी रखने का फैसला किया है. बुधवार को जारी सर्कुलर में खेल एवं युवा मंत्रालय (Ministry of Youth Affairs and Sports) ने साफ किया कि भारतीय टीमें पाकिस्तान में किसी भी द्विपक्षीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेंगी और न ही पाकिस्तानी टीमों को भारत में ऐसे मुकाबलों की अनुमति दी जाएगी.
हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मल्टी-नेशनल और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा. यानी, अगर किसी टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान दोनों शामिल हैं, तो भारतीय खिलाड़ी उसमें हिस्सा ले सकेंगे. इसी तरह, भारत में आयोजित मल्टी-नेशनल इवेंट्स में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की भागीदारी भी संभव होगी.
यह नीति पहली बार अगस्त 2025 में लागू की गई थी, जब एशिया कप में भारत की भागीदारी को लेकर विवाद हुआ था. यह फैसला पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी.
मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी को लेकर भारत, संबंधित ग्लोबल स्पोर्ट्स बॉडीज की गाइडलाइंस और अपने खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता देगा. यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक गेम्स की मेजबानी का दावेदार है.
भारत को एक 'प्रेफर्ड स्पोर्टिंग डेस्टिनेशन' बनाने के लिए सरकार ने खिलाड़ियों, कोच, टेक्निकल स्टाफ और अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स संगठनों के अधिकारियों के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने का ऐलान किया है.
इंटरनेशनल स्पोर्ट्स बॉडीज के पदाधिकारियों को उनके कार्यकाल के दौरान अधिकतम 5 साल के लिए मल्टी-एंट्री वीज़ा प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा. इसके अलावा, इन अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को भारत दौरे के दौरान सभी प्रोटोकॉल और सुविधाएं दी जाएंगी. इस बीच, मंत्रालय ने एक और बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए अपना कार्यालय शास्त्री भवन से शिफ्ट कर नेताजी नगर स्थित नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क