आज भारत की कच्चा तेल खरीद नीति पर चर्चा महत्वपूर्ण है. भारत कभी भी रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर किसी विशेष करार में नहीं था. जब तक रूस से तेल खरीदकर फायदा था, भारत ने इस विकल्प को चुना. लेकिन जब रूस से पर्याप्त डिस्काउंट नहीं मिला तो भारत अन्य स्रोतों जैसे वेनेजुएला की ओर देखने लगा. वेनेजुएला से भारत पहले भी बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था, खासकर यूक्रेन युद्ध से पहले. अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर प्रतिबंधों के बाद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू किया, क्योंकि वहां ज्यादा लाभ था. अब जब बाजार में परिस्थितियां बदल रही हैं, भारत उसी स्रोत से तेल खरीदेगा जहां उसे सर्वोत्तम लाभ मिल सके. यह निर्णय अमेरिका के दबाव के कारण नहीं बल्कि देश के स्वार्थों के तहत लिया जा रहा है.