मुंबई और महाराष्ट्र के लिए हमेशा लड़ने वाले बाला साहेब ठाकरे, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, जो अलग अलग रास्तों पर चले थे, अब एक बार फिर संकट में एक साथ आ गए हैं. मुंबई और महाराष्ट्र जब संकट में होते हैं तो मराठी माणूस का अस्तित्व खतरे में महसूस होता है. इस परिस्थिति में दोनों ठाकरे भाइयों ने अपने मतभेदों को भुलाते हुए एकजुट होकर महाराष्ट्र और मराठी माणूस के हितों की रक्षा करने का संकल्प लिया है.