प्रेमानंद महाराज के अनुसार, मृत्यु कोई वास्तविक अंत नहीं है, बल्कि यह एक तरह का भ्रम है. हमारा शरीर पंच तत्वों अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश से बना है,मृत्यु के बाद ये तत्व फिर से प्रकृति में मिल जाते हैं. उनका कहना है कि आत्मा कभी खत्म नहीं होती, वह अविनाशी है.