सूरज इतनी तेज चमकता है तो रात का आसमान इतना काला क्यों है?

रात का आसमान काला क्यों दिखता है? ब्रह्मांड में अरबों तारे हैं, फिर भी अंधेरा क्यों? इसका कारण ओल्बर्स पैराडॉक्स है. ब्रह्मांड की उम्र सिर्फ 13.8 अरब साल है, इसलिए दूर के तारों की रोशनी अभी हम तक नहीं पहुंची. साथ ही, ब्रह्मांड फैल रहा है, जिससे रोशनी रेडशिफ्ट होकर अदृश्य (इन्फ्रारेड) हो जाती है. हमारी आंखें सिर्फ दिखने वाली रोशनी देख सकती हैं, इसलिए आसमान काला लगता है.

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जब सूरज जैसे अरबों तारे हैं तो रात का आसमान काला ही क्यों दिखता है. (Photo: ITG) जब सूरज जैसे अरबों तारे हैं तो रात का आसमान काला ही क्यों दिखता है. (Photo: ITG)

रदीफा कबीर

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:02 PM IST

रोज सूरज की रोशनी से पृथ्वी चमकती है, लेकिन अंतरिक्ष में रात का आसमान काला क्यों दिखता है? ब्रह्मांड में अरबों-खरबों तारे और गैलेक्सी हैं, फिर भी रात में सिर्फ कुछ चमकते तारे दिखते हैं और बाकी जगह काली क्यों रहती है? 

अगर ब्रह्मांड में हर तरफ तारे भरे पड़े हैं, तो पूरा आसमान दिन की तरह चमकना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं होता. यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों को परेशान करता रहा है. इसे ओल्बर्स पैराडॉक्स कहते हैं. जर्मन खगोलशास्त्री हेनरिक विल्हेम ओल्बर्स ने 1823 में इसकी चर्चा की थी.

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ओल्बर्स पैराडॉक्स क्या है?

कल्पना कीजिए एक बहुत घना जंगल जहां हर तरफ पेड़ ही पेड़ हैं. अगर आप जंगल में खड़े हों, तो चाहे जिस दिशा में देखें, आपकी नजर किसी न किसी पेड़ पर पड़ ही जाएगी. ब्रह्मांड भी ऐसा ही होना चाहिए. अगर ब्रह्मांड अनंत है. इसमें अनंत तारे हैं, तो हर दिशा में हमारी नजर किसी तारे पर पड़नी चाहिए. इससे पूरा रात का आसमान चमकदार होना चाहिए, जैसे दिन में सूरज की रोशनी से होता है. लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. आसमान में काले-काले खाली स्थान हैं. यही ओल्बर्स पैराडॉक्स है. 

ब्रह्मांड की उम्र ही है मुख्य कारण

इस पैराडॉक्स का सबसे बड़ा जवाब ब्रह्मांड की उम्र है. नासा के अनुसार ब्रह्मांड की उम्र लगभग 13.8 अरब साल है. रोशनी की गति सीमित है – यह प्रति सेकंड 3 लाख किलोमीटर चलती है. बहुत दूर के तारों की रोशनी अभी तक हम तक नहीं पहुंची है.

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हम सिर्फ इतने दूर के तारे देख सकते हैं जितनी दूर की रोशनी 13.8 अरब साल में पहुंच सकती है. उससे आगे के तारे अभी अंधेरे में हैं क्योंकि उनकी रोशनी रास्ते में है. अगर ब्रह्मांड अनंत पुराना होता, तो सब रोशनी पहुंच चुकी होती और आसमान चमकदार होता. लेकिन ब्रह्मांड युवा है, इसलिए आसमान में काले स्थान हैं.

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ब्रह्मांड का फैलना और रेडशिफ्ट का खेल

दूसरा बड़ा कारण ब्रह्मांड का फैलना है. ब्रह्मांड लगातार बढ़ रहा है. जैसे-जैसे जगह फैलती है, दूर के तारों से आने वाली रोशनी की तरंगें भी खिंच जाती हैं. इसकी वजह से रोशनी का रंग बदल जाता है – नीले से लाल, फिर इन्फ्रारेड और माइक्रोवेव में चला जाता है. इसे रेडशिफ्ट कहते हैं। हमारी आंखें सिर्फ दृश्य रोशनी (visible light) देख सकती हैं, इन्फ्रारेड या माइक्रोवेव नहीं. इसलिए दूर की रोशनी हमारे लिए अदृश्य हो जाती है. आसमान भरा हुआ है रोशनी से, लेकिन हमारी आंखें उसे नहीं देख पातीं.

कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड – ब्रह्मांड की पहली रोशनी

अगर हम माइक्रोवेव में देख सकें, तो पूरा आसमान चमकता दिखेगा. कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB) बिग बैंग की बची हुई रोशनी है जो पूरे ब्रह्मांड में फैली हुई है. हमारी आंखों को यह काला दिखता है, लेकिन वैज्ञानिक उपकरण इसे गर्म चमक के रूप में पकड़ते हैं. हबल और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप जैसे उपकरण अंधेरे पैच में हजारों गैलेक्सी दिखाते हैं, जिनकी रोशनी बहुत दूर की है और रेडशिफ्टेड है.

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ब्रह्मांड युवा और फैलता हुआ है

रात का आसमान काला इसलिए है क्योंकि ब्रह्मांड अनंत पुराना नहीं है और न ही स्थिर है. रोशनी पहुंचने में समय लगता है और फैलाव से वह अदृश्य हो जाती है. यह हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड कितना विशाल, युवा और गतिशील है. अगर हम इंसान माइक्रोवेव या इन्फ्रारेड देख पाते, तो रात का आसमान दिन से भी ज्यादा चमकदार लगता. लेकिन हमारी सीमित आंखें हमें इस खूबसूरत अंधेरे का आनंद लेने देती हैं. यह पैराडॉक्स ब्रह्मांड की शुरुआत और उसके फैलाव का सबूत है.

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