आज के दिन 1 मार्च 1966 को सोवियत रूस के स्पेसक्राफ्ट वेनरा-3 की शुक्र ग्रह पर क्रैश लैंडिंग हुई थी. यह दुनिया का पहला स्पेसक्राफ्ट था, जिसने किसी दूसरे ग्रह की सतह को छुआ था. इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. पहली बार कोई अंतरिक्ष यान पृथ्वी के अलावा किसी और ग्रह की सतह पर उतरा हो.
15 नवंबर, 1965 को कजाकिस्तान से सोवियत प्रक्षेपण यान वेनेरा-3 लॉन्च किया गया था.चार महीने बाद यह सूर्य के दूसरे सबसे नजदीकी ग्रह शुक्र से टकरा गया. दरअसल, वेनेरा-3 शुक्र के वायुमंडल को मापने के मिशन पर था. अंतरिक्षयान शुक्र के वायुमंडल तक तो पहुंच गया, लेकिन उसकी सतह पर क्रैश लैंडिग हुई और वेनेरा -3 अपने मिशन पूरा नहीं कर पाया.
इसके बावजूद यह किसी अन्य ग्रह की सतह पर पहुंचने वाला पहला मानवरहित अंतरिक्ष यान था. हालांकि, वेनेरा-3 की लॉन्चिंग से चार साल पहले अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट मेरिनर-2 शुक्र के इतने करीब से गुजरा था कि उसने ग्रह का वैज्ञानिक माप ले सका था और शुक्र की सतह पर 800 डिग्री फ़ारेनहाइट से अधिक तापमान का पता लगा सका था. फिर भी वह शुक्र की सतह पर नहीं उतर पाया था. वहीं वेनेरा-3 का मिशन भले ही फेल हो गया हो, लेकिन वह शुक्र की सतह तक पहुंच गया था.
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एक साल बाद 1967 में वेनेरा- 4 ने वह कर दिखाया, जिसे करने में वेनेरा-3 असफल रहा था. इसने थर्मामीटर, बैरोमीटर, वायुमंडलीय घनत्व मापक और गैस विश्लेषक सहित कई वैज्ञानिक उपकरणों को शुक्र के वायुमंडल में सफलतापूर्वक स्थापित किया.
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फिर, 1970 में, वेनेरा-7 मानव निर्मित पहला अंतरिक्ष यान बना जिसने शुक्र पर सहज लैंडिंग की. इसने ग्रह की सतह पर अत्यधिक उच्च तापमान और वायुमंडलीय दबाव के कारण नष्ट होने से पहले 23 मिनट तक सफलतापूर्वक चित्र और डेटा भेजा.
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