आपने कभी गर्दन या चेहरे की मसाज करवाई होगी? बस 5-10 मिनट में कितना आराम, कितना तरोताजा महसूस होता है ना?
अब वैज्ञानिकों ने इसका असली राज ढूंढ लिया है. ये मजा सिर्फ मांसपेशियों के ढीले होने से नहीं आता… बल्कि ये दिमाग की अंदरूनी सफाई को दोगुना तेज कर देता है.
दक्षिण कोरिया के Institute for Basic Science (IBS) के वैज्ञानिकों ने चूहों पर परीक्षण किया. उन्होंने चेहरे और गर्दन की त्वचा को हल्के-हल्के यांत्रिक तरीके से मसाज किया. नतीजा? दिमाग से निकलने वाला सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) – यानी दिमाग का सफाई वाला पानी – दोगुना तेज बहने लगा.
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दिमाग कैसे साफ होता है?
हमारा दिमाग हर रोज हानिकारक प्रोटीन और कचरा बनाता है. ये कचरा अगर जमा हो जाए तो अल्जाइमर, पार्किंसन जैसी बीमारियां हो जाती हैं.
दिमाग इस कचरे को CSF के जरिए लिम्फेटिक वेसल्स के रास्ते बाहर निकालता है. वैज्ञानिकों ने पाया कि चेहरे और गर्दन की त्वचा के नीचे मौजूद लिम्फेटिक वेसल्स को हल्का मसाज करने से ये वेसल्स बेहतर काम करती हैं.
नतीजा: दिमाग का कचरा तेजी से साफ होता है. बुजुर्ग चूहों में भी ये तरीका काम किया. उनकी सफाई प्रणाली पहले कमजोर हो चुकी थी, लेकिन मसाज के बाद वो नॉर्मल लेवल पर आ गई.
और भी बड़ा खुलासा
वैज्ञानिकों को दिमाग से चेहरे की लिम्फ नोड्स तक जाने वाले पूरी तरह नए रास्ते मिले. ये रास्ते बूढ़े चूहों में भी ठीक-ठाक काम कर रहे थे. यानी उम्र बढ़ने पर भी गर्दन-चेहरा मसाज से दिमाग की सफाई बढ़ाई जा सकती है.
भविष्य में क्या होगा?
घर पर ही गर्दन मसाज करने वाला छोटा वियरेबल डिवाइस बन सकता है. क्लिनिक में डॉक्टर आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे. अल्जाइमर जैसी बीमारियों को रोकने या धीमा करने का सस्ता, बिना दवा वाला तरीका. अभी ये परीक्षण चूहों पर हुआ है. इंसानों पर और ज्यादा रिसर्च चल रही है. लेकिन वैज्ञानिक बहुत उम्मीद से भरे हुए हैं.
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तो गर्दन मसाज में मजा क्यों आता है?
क्योंकि आपका दिमाग चुपके से कह रहा होता है – वाह! मेरी सफाई हो रही है.
अगली बार जब कोई गर्दन दबाए, तो बस आंखें बंद करके एन्जॉय करें. आपका दिमाग सच में धन्यवाद दे रहा होगा. रोज 5-10 मिनट गर्दन और चेहरे की हल्की मसाज जरूर करें. कोई महंगा उपकरण नहीं चाहिए – हाथों से भी काम हो जाता है. स्वास्थ्य की ऐसी छोटी-छोटी आदतें ही लंबी उम्र और तेज दिमाग का राज हैं.
ऋचीक मिश्रा