लद्दाख के हानले डार्क स्काई रिजर्व में 19 और 20 जनवरी की रातें आम नहीं थीं. आमतौर पर गहरे नीले आकाश में सिर्फ तारे और आकाशगंगाएं दिखती हैं, लेकिन इन रातों में खून जैसा लाल ऑरोरा - जैसे नॉर्दन लाइट्स की तरह चमक उठा.
सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें वायरल हो गईं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ खूबसूरत नजारा नहीं – सूरज की बढ़ती एक्टिविटी का चेतावनी संकेत है. यह भारत के सैटेलाइट, पावर ग्रिड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा है.
क्या हुआ था? – सूरज का तूफान
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लाल ऑरोरा क्यों दिखा? – वैज्ञानिक वजह
ऑरोरा तब बनता है जब सूरज के चार्ज्ड पार्टिकल्स पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं. वायुमंडल के ऑक्सीजन/नाइट्रोजन एटम्स को एक्टिवेट करते हैं. आमतौर पर ध्रुवीय इलाकों (उत्तर/दक्षिण) में हरा दिखता है, लेकिन हानले जैसे कम अक्षांश (latitude) में 300 किमी ऊपर ऑक्सीजन एटम्स से लाल रंग बनता है. यह सूरज के सोलर मैक्सिमम की वजह से ज्यादा हो रहा है.
भारत के लिए खतरा क्यों?
यह सुंदरता के पीछे बड़ा खतरा छिपा है...
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भारत क्या कर रहा है? – तैयारी और समाधान
Aditya-L1 मिशन L1 पॉइंट पर है – सूरज से 15 लाख किमी दूर मौजूद है. यह CME को 24-48 घंटे पहले डिटेक्ट कर चेतावनी देता है. इससे सैटेलाइट्स को सेफ मोड में डाल सकते हैं. ग्रिड को बैलेंस कर सकते हैं. हानले ऑब्जर्वेटरी (भारतीय एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी) ग्राउंड डेटा देता है, जो सैटेलाइट डेटा को वैलिडेट करता है.
सुंदरता के साथ खतरे को समझें
हानले का लाल आकाश 2026 की शुरुआत में एक शानदार नजारा है, लेकिन यह सूरज के जागने का संकेत है. सोलर साइकल में ऐसे तूफान बढ़ेंगे. भारत को स्पेस वेदर फोरकास्टिंग मजबूत करनी होगी, सैटेलाइट्स और ग्रिड को सुरक्षित बनाना होगा. वैज्ञानिक कहते हैं – हमारा इलेक्ट्रॉनिक दुनिया ज्यादा नाजुक है जितना हम सोचते हैं. हानले जैसे जगहों को बचाकर हम अंतरिक्ष को देखते रहेंगे और खतरे से बचेंगे.
रदीफा कबीर