अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. उसने लगभग 20 अरब डॉलर (करीब 1.87 लाख करोड़ रुपये) की एक बेहद बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा की है. इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य चंद्रमा पर एक स्थाई इंसानी बेस बनाना है. इसके बाद मंगल ग्रह के लिए परमाणु तकनीक का परीक्षण करना है. अंतरिक्ष मिशनों को छोटे-छोटे मिशनों से आगे बढ़ाकर लंबे समय तक रहने वाले मिशनों में बदलना है.
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चंद्रमा पर स्थाई बेस क्यों बनाना चाहता है NASA?
पहले NASA के मिशन सिर्फ कुछ दिनों या हफ्तों के लिए होते थे. अब वह चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसानों को रहने और काम करने की सुविधा बनाना चाहता है. इसमें ह्यूमन सेटलमेंट, बिजली बनाने की व्यवस्था, संचार नेटवर्क और नियमित क्रू व कार्गो मिशन शामिल होंगे. एजेंसी का मानना है कि चंद्रमा पर मजबूत बुनियादी ढांचा बनाने से आगे मंगल ग्रह तक जाना आसान हो जाएगा.
आर्टेमिस मिशन के तहत होगी योजना
यह पूरी योजना NASA के आर्टेमिस मिशन के तहत चलेगी. आर्टेमिस मिशन का टारगेट चंद्रमा पर स्थाई तौर पर इंसानों की मौजूदगी पुख्ता करना है. आर्टेमिस IV मिशन के तहत 2028 में अंतरिक्ष यात्री पहली बार चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे. आर्टेमिस III अब सिर्फ नई तकनीकों का परीक्षण करेगा. 2027 से चंद्रमा पर लगभग हर महीने उपकरण, रोवर और वैज्ञानिक सामान भेजे जाएंगे.
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परमाणु ऊर्जा से चलेगा चंद्रमा बेस
मिशन का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा परमाणु ऊर्जा है. NASA अमेरिकी ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर 2030 तक चंद्रमा पर एक छोटा परमाणु रिएक्टर लगाने की योजना बना रहा है. यह रिएक्टर चंद्रमा की लंबी और अंधेरी रातों में भी लगातार बिजली देगा, जहां सूरज की रोशनी नहीं होती. परमाणु ऊर्जा के बिना चंद्रमा पर लंबे समय तक रहना मुश्किल है.
मंगल ग्रह के लिए नई तकनीक
NASA ने 2028 से पहले ‘स्पेस रिएक्टर-1 (SR-1) फ्रीडम’ मिशन लॉन्च करने की घोषणा की है. इस मिशन में न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक का परीक्षण किया जाएगा. यह तकनीक पुराने रॉकेटों से ज्यादा तेज और कुशल है, जिससे मंगल तक का सफर आसान हो सकता है.
मंगल पर नई पीढ़ी के हेलीकॉप्टर भी भेजे जाएंगे, जो उन इलाकों की खोज करेंगे जहां रोवर नहीं पहुंच सकते. NASA इस योजना में निजी कंपनियों को भी ज्यादा शामिल कर रहा है. इससे लागत कम होगी और काम तेजी से होगा. नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन कहते हैं कि NASA अब तेज फैसले ले रहा है. पुरानी धीमी व्यवस्था को बदल रहा है.
आजतक साइंस डेस्क