वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में यूनियन बजट 2026-27 में न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर को बड़ा बूस्ट मिला है. सरकार ने न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए इम्पोर्ट होने वाले सामानों पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) छूट को 2035 तक बढ़ा दिया है. साथ ही, यह छूट अब सभी न्यूक्लियर प्लांट्स पर लागू होगी, चाहे उनकी क्षमता कितनी भी हो.
क्या है यह ऐलान और क्यों महत्वपूर्ण?
पहले यह छूट कुछ खास न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स (जैसे बड़े रिएक्टर वाले) पर सीमित थी. समय-समय पर बढ़ाई जाती थी. अब इसे 2035 तक एक्सटेंड किया गया है.सभी प्लांट्स (छोटे-बड़े, SMR से लेकर बड़े रिएक्टर तक) को शामिल किया गया है.
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इससे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले आयातित सामान (जैसे स्पेशल स्टील, कंट्रोल रॉड्स, रिएक्टर पार्ट्स, टर्बाइन कंपोनेंट्स आदि) सस्ते होंगे. कस्टम्स ड्यूटी माफ होने से प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 5-10% तक कम हो सकती है, जो बड़े निवेश को बुलाएगा.
भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम की स्थिति
भारत का लक्ष्य 2047 तक क्लीन और सस्ती ऊर्जा के लिए बड़ी योजनाएं चला रहा है. फिलहाल भारत की कुल बिजली क्षमता में न्यूक्लियर का हिस्सा सिर्फ 3% के करीब है (लगभग 7-8 GW). लेकिन सरकार का प्लान है कि 2030 तक 22 GW और 2047 तक 100 GW तक पहुंचना.
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इस छूट से क्या फायदे होंगे?
चुनौतियां क्या हैं?
न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा, पर्यावरण और लोकल विरोध की चुनौतियां रहती हैं. लेकिन सरकार Atomic Energy Act में संशोधन और सिविल लायबिलिटी एक्ट में बदलाव कर रही है ताकि प्राइवेट सेक्टर आसानी से आए. यह बजट ऐलान भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लंबे समय तक मजबूती देगा.
2035 तक छूट से बड़े-छोटे सभी प्लांट्स सस्ते बनेंगे, जिससे क्लीन एनर्जी का लक्ष्य तेजी से पूरा होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे भारत की तरक्की को नया बूस्टर मिलेगा, क्योंकि सस्ती और भरोसेमंद बिजली से इंडस्ट्री, जॉब्स और अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ेगी.
ऋचीक मिश्रा