आsss...थू... और दर्द गायब, इंसान की थूक में छिपा है मॉर्फिन से कई गुना ताकतवर पेनकिलर

इंसानी की थूक में ओपियोर्फिन नाम का एक प्राकृतिक पदार्थ है जो दर्द कम करने में मॉर्फिन से छह गुना ज्यादा ताकतवर है. यह शरीर के अपने दर्द निवारक रसायनों की रक्षा करता है. मजेदार बात ये कि पेनकिलर की तरह इससे नशा नहीं होता. वैज्ञानिक अब इसकी मदद से नई सुरक्षित दर्द निवारक दवाएं बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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इंसान के थूक में ऐसा नेचुरल केमिकल होता है जो दर्द को कम करने में बेहद असरदार है. (Photo: Getty) इंसान के थूक में ऐसा नेचुरल केमिकल होता है जो दर्द को कम करने में बेहद असरदार है. (Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

दुनिया भर के वैज्ञानिकों को अब एक नई खोज ने हैरान कर दिया है. हमारी लार में एक ऐसा जादुई पदार्थ छिपा है जो दर्द को कम करने में मॉर्फिन से भी छह गुना ज्यादा ताकतवर साबित हो रहा है. इसका नाम है ओपियोर्फिन. यह कोई नई दवा नहीं है, बल्कि हमारा शरीर खुद इसे पैदा करता है. 

हर बार जब हम बात करते हैं. चबाते हैं या निगलते हैं,  ब थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लार के साथ बाहर आता है. आइए समझते हैं कि ओपियोर्फिन क्या है. कैसे काम करता है और भविष्य में दर्द की दवाओं को कैसे बदल सकता है.

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ओपियोर्फिन क्या है और यह कैसे काम करता है?

ओपियोर्फिन एक प्राकृतिक केमिकल है जो हमारी लार में मौजूद होता है. यह सीधे दिमाग के ओपियोइड रिसेप्टर्स से नहीं जुड़ता जैसा कि मॉर्फिन या अन्य दर्द निवारक दवाएं करती हैं. इसके बजाय यह हमारे शरीर के अपने प्राकृतिक दर्द निवारक रसायनों यानी एन्केफेलिन्स की रक्षा करता है. 

ये एन्केफेलिन्स शरीर में बनते हैं. दर्द को कम करने का काम करते हैं, लेकिन सामान्य रूप से वे जल्दी टूट जाते हैं. ओपियोर्फिन उन्हें टूटने से बचाता है, जिससे वे लंबे समय तक काम करते रहते हैं. दर्द आसानी से कम होता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तरीका शरीर की प्रणाली को मजबूत बनाता है, बिना किसी बाहरी केमिकल के.

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मॉर्फिन से छह गुना ज्यादा ताकतवर, फिर भी सुरक्षित

जो बात सबसे ज्यादा हैरान करने वाली है वह यह है कि ओपियोर्फिन दर्द कम करने में मॉर्फिन से छह गुना ज्यादा प्रभावी पाया गया है. लेकिन इसके साथ कोई खतरा नहीं है. पारंपरिक ओपियोइड दवाएं सीधे दिमाग पर असर करती हैं, जिससे नशे की आदत पड़ जाती है. सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. 

ओपियोर्फिन ऐसा नहीं करता. यह सिर्फ शरीर के अपने रसायनों को लंबे समय तक सक्रिय रखता है. इसलिए इसमें नशे नहीं होता है. वैज्ञानिक इसे पूरी तरह सुरक्षित और गैर-नशे वाले दर्द निवारक के रूप में देख रहे हैं.

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वैज्ञानिक क्यों कर रहे हैं इस पर रिसर्च?

अब वैज्ञानिक इस प्राकृतिक अणु से नई पीढ़ी की दर्द निवारक दवाएं बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वे कहते हैं कि अगर हम ओपियोर्फिन की नकल कर सकें तो ऐसी दवाएं बन सकती हैं जो दर्द को बिना किसी साइड इफेक्ट के खत्म कर दें. अभी पारंपरिक दवाओं से लाखों लोग नशे का शिकार हो रहे हैं. ओपियोर्फिन जैसी दवा उस समस्या का समाधान हो सकती है. वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि कुछ सालों में यह नई दवाओं का आधार बनेगा. 

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हर रोज हमारा शरीर खुद दर्द पर काबू करता है

सबसे रोचक बात यह है कि ओपियोर्फिन हमारे शरीर में हर समय मौजूद रहता है. जब हम बोलते हैं. खाना चबाते हैं या पानी पीते हैं, तब यह थोड़ी मात्रा में रिलीज होता है. इसका मतलब है कि प्रकृति ने हमें खुद का दर्द नियंत्रण तंत्र दे रखा है. विकास की प्रक्रिया ने हमें इतने सारे हथियार दिए हैं जिनके बारे में हम पहले नहीं जानते थे. वैज्ञानिक अब समझ रहे हैं कि हमारे शरीर में छुपी ये छोटी-छोटी व्यवस्थाएं कितनी शक्तिशाली हैं.

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