विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर इस मौसम में एक नया रिकॉर्ड बन गया है. 20 मई को एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया. सफल चढ़ाई के बाद वापसी के दौरान दो भारतीय पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी और संदीप आर की मौत हो गई. नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, दोनों ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने के बाद उतरते समय बेहद थकान के शिकार हो गए. शेरपा गाइड्स ने कोशिश की लेकिन बचा नहीं पाए.
सफल चढ़ाई के बाद उतरते समय थकान और ऊंचाई की वजह से दोनों भारतीय पर्वतारोही बुरी तरह प्रभावित हुए. संदीप आर बुधवार को चोटी पर पहुंचे थे, जबकि अरुण कुमार तिवारी गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे चोटी पर पहुंचे. वापसी के दौरान बैलकनी क्षेत्र और हिलेरी स्टेप के पास दोनों की हालत बिगड़ गई.
इस सीजन में एवरेस्ट पर अब तक कुल 5 मौतें हो चुकी हैं. इनमें तीन नेपाली पर्वतारोही पहले ही मारे जा चुके थे. 20 मई को नेपाल की तरफ से 274 पर्वतारोहियों ने 8,848.86 मीटर ऊंची एवरेस्ट चोटी पर एक साथ कदम रखा. यह अब तक का सबसे बड़ा एक दिवसीय रिकॉर्ड है.
इसमें पुणे के तीन पर्वतारोही भी शामिल थे, जिन्होंने सफलतापूर्वक चोटी पर तिरंगा फहराया. मौसम साफ रहने के कारण इस साल बड़ी संख्या में पर्वतारोही एक साथ चोटी तक पहुंचने में सफल रहे. नेपाल सरकार ने इस सीजन में कुल 502 पर्वतारोहियों को परमिट जारी किए थे.
20 मई को एक ही दिन में 274 पर्वतारोहियों ने एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया. यह संख्या 2019 के रिकॉर्ड (223 पर्वतारोही एक दिन में) को तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर गई है.
एवरेस्ट पर हर साल सैकड़ों लोग चढ़ाई के लिए आते हैं. नेपाल के लिए यह बड़ा पर्यटन और आर्थिक स्रोत है. लेकिन बढ़ती संख्या के कारण ट्रैफिक जाम, थकान और ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का चढ़ना जोखिम को और बढ़ा देता है. सफल चढ़ाई के बाद उतरना और भी खतरनाक होता है क्योंकि उस समय थकान चरम पर होती है और मौसम अचानक बदल सकता है.
नेपाल सरकार हर साल सैकड़ों परमिट जारी करती है. प्रत्येक परमिट की कीमत करीब 15 हजार डॉलर है. एवरेस्ट अभियान नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंताएं भी जताई जा रही हैं.