Vastu Tips: आप किसी काम को लेकर प्लानिंग तो बहुत करते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं कर पाते. या फिर योजनाओं को शुरू करने को लेकर मन में कुछ भय रहता है. कुछ भी करने से पहले न जाने कौन सा डर आपको रोक लेता है. कुछ नया करने का आत्मविश्वास नहीं रहता. आपकी योजनाओं का लाभ दूसरे उठा लेते हैं, लेकिन आत्मविश्वास की कमी के कारण आप पीछे रह जाते हैं. विद्यार्थियों के संदर्भ में बात करें तो सब कुछ जानने-समझने के बाद भी शिक्षक के सामने कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते. शारीरिक स्वास्थ्य में भी कुछ कमजोरी महसूस होती है तो निश्चित ही आपके घर या कार्यालय के साउथ-साउथ-ईस्ट (दक्षिण-दक्षिण-पूर्व) दिशा में वास्तु दोष की गड़बड़ है.
ज्योतिषीय पहलू से देखें तो यह समस्या कुंडली के 12वें भाव से संबंध रखती है. काल पुरुष की कुंडली के अनुसार 12वां भाव मीन राशि को दर्शाता है. जो मुक्ति, कुछ छोड़कर आगे बढ़ने और आपके शारीरिक स्वास्थ्य को भी दर्शाता है. यदि कुंडली और घर दोनों में यह स्थान पीड़ित हो तो समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है. व्यक्ति रचनात्मक, कलात्मक और एक अच्छा प्लानर होते हुए भी जीवन में आगे बढ़ने के लिए खूब संघर्ष करता है. लेकिन कुछ नया करने के लिए आत्मविश्वास की कमी उसे हमेशा परेशान करती रहती है.
दक्षिण-दक्षिण-पूर्व का वास्तु दोष कैसे दूर करें?
दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व की दिशा होती है. यहां जल व आकाश तत्व से संबंधित चीजें या रंग वास्तु दोष पैदा करती हैं. यहां नीला, काला, मिल्की सफेद रंग जीवन में परेशानी पैदा कर सकता है. इस दिशा में लाल, नारंगी, गुलाबी रंग का होना अच्छा माना जाता है. इस दिशा में कबाड़ वाला स्टोरेज या किसी तरह का गड्ढा होना आपके आत्मविश्वास में कमी लाता है.
वहीं एल्यूमीनियम और आयरन का सामान भी इस दिशा के गुण धर्मों को दूषित करता है. तांबा, पीतल और स्टील के सामान को इस दिशा में रखा जा सकता है. सब कुछ ठीक होने पर भी आत्मविश्वास में कमी है तो इस दिशा में कुछ समय जरूर बिताएं. शारीरिक कमजोरी दूर होने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. यहां रखा भोजन और यहां बैठकर भोजन करने से भी लाभ मिलता है.
अंशु पारीक