आचार्य चाणक्य ने जीवन में आने वाले संकटों से उबरने के लिए अपनी चाणक्य नीति में सैकड़ों नीतियों का उल्लेख किया है. इसमें वो बताते हैं कि किस प्रकार व्यक्ति के जीवन की 5 चीजें उसके जन्म लेने से पहले ही निर्धारित कर दी जाती हैं. साथ ही वो बताते हैं कि किस प्रकार की स्थिति में जगह को छोड़कर भागने वाला व्यक्ति सफल होता है. यही नहीं, आचार्य बताते हैं कि जो व्यक्ति चार चीजों को अपने जीवन में प्राप्त नहीं करता उसका जन्म लेना व्यर्थ है. आइए जानते हैं चाणक्य के इन नीतियों के बारे में...
आयुः कर्म च विद्या च वित्तं निधनमेव च ।
पञ्चैतानि विलिख्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आयु, कर्म, धन-संपत्ति, विद्या और मौत, ये पांच चीजें मनुष्य के भाग्य में उसी समय लिख दी जाती हैं जब वो गर्भ में होता है. बाद में इनमें किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं होता. जिसकी जितनी उम्र होती है उससे पहले उसे कोई नहीं मार सकता. जीवन में मिलने वाले धन और विद्या भी पहले से ही निर्धारित होती है.
धर्मार्थकाममोक्षेषु यस्यैकोऽपि न विद्यते।
जन्म-जन्मनि मत्र्येषु मरणं तस्य केवलम्।।
चाणक्य नीति के इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का जीवन चार मुख्य उद्देश्यों के लिए बनाया गया है, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष. जिसे इन चारों में से एक भी चीज नहीं मिल पाती उसका जन्म केवल मरने के लिए ही हुआ है. ऐसे लोगों का जीवन व्यर्थ है. आचार्य के अनुसार मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलकर संपत्ति प्राप्त करनी चाहिए और उसका उपभोग करना चाहिए. साथ ही विवाह कर संतान उत्पन्न करना चाहिए. धर्म, अर्थ और काम के लिए पुरुषार्थ करने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है.
उपसर्गे अन्यचक्रे च दुर्भिक्षे च भयावहे।
असाधुर्जनसंपर्के यः पलायति स जीवति॥
चाणक्य के मुताबिक व्यक्ति को समय की सूझ होना आवश्यक है. वो कहते हैं कि जहां दंगा, उपद्रव या हमला होने पर मौके से गायब हो जाने यानी भाग जाने वाला व्यक्ति ही जीता है. साथ ही चाणक्य कहते हैं कि अगर कहीं अकाल पड़ जाए या दुष्टों का साथ मिले तो वहां से तुरंत स्थान छोड़ देना चाहिए. समय पर ऐसा कर पाने वाला व्यक्ति खुद को बचाने में सफल होता है.
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