अगर किसी एक महीने में दो ग्रहण एक साथ पड़ते हैं तो ज्योतिष के नजरिये से इसे अशुभ माना जाता है. हमारी पुरानी मान्यताओं के अनुसार ग्रहण राहु और केतु की वजह से लगता है. भागवत पुराण में कहानी मिलती है कि राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा को निगल लेते हैं, इसलिए कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाता है. ज्योतिष में राहु को अचानक घटना, उलझन और राजनीति से जोड़ा जाता है. केतु को अलगाव, नुकसान या अचानक बदलाव का संकेत माना जाता है.
पड़ सकता है नकारात्मक असर?
ज्योतिष में सूर्य मतलब सत्ता, नेता, सरकार और आत्मविश्वास. इसलिए सूर्यग्रहण को अक्सर सरकार, बड़े फैसलों या राजनीतिक हलचल से जोड़कर देखा जाता है. वहीं चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतीक है. इसलिए चंद्रग्रहण को लोगों के मूड, गुस्से, अफवाह या तनाव से जोड़कर समझा जाता है. वराहमिहिर के लिखे ग्रंथ बृहत् संहिता में लिखा है कि ग्रहण का असर राजसत्ता, मौसम और जनजीवन पर पड़ सकता है.
बरतनी होगी खास सावधानियां
इस सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दौरान खास सावधानी बरतने की जरूरत है. कायदे से देखें तो सूर्यग्रहण से लेकर चंद्रग्रहण के 15 दिनों के बीच का समय अशुभ ही है. क्योंकि सूर्यग्रहण की शुरुआत पंचक से हो रही है. ये पंचक अग्नि पंचक है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो उस समय को पंचक कहा जाता है. पंचक पांच दिनों का होता है.
अग्नि पंचक क्यों खतरनाक है?
अग्नि पंचक खतरनाक और अशुभ इसलिए होता है, क्योंकि इस दौरान आग की घटनाएं, मृत्यु का भय, दुर्घटनाओं के बुरे योग बनते हैं. इससे भी बड़ी बात ये है कि इन पांच दिनों में ये घटनाएं पांच बार हो सकती हैं. जिन लोगों की कुंडली पर राहु-केतु की दशा चल रही हो या फिर जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्रमा कमजोर हों. उनके लिए सूर्य और चंद्र ग्रहण के अलावा ये अग्नि पंचक भी निगेटिव असर डाल सकता है.
बेवजह झगड़ों से बचें
इसलिए जरूरी है कि इस दौरान बेवजह झगड़े से बचें, क्योंकि सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण सबसे पहले आपके मन-बुद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा पर असर डालते हैं. केतु छाया ग्रह है और भ्रम की स्थिति बनाता है.
इसके साथ ही गुस्से में फैसले न लें, क्योंकि राहु सोचने-समझने की ताकत को कमजोर कर देता है. गुस्से में फैसला तो खैर कभी भी नहीं लेना चाहिए. वहीं अगर किसी मामले में डिलिमा वाली सिचुएशन बन रही है तो उसे रोक दें, स्थिति खुद-ब-खुद क्लियर हो जाएगी.
सेहत का ध्यान रखें
तीसरा सबसे जरूरी है कि सेहत का ध्यान रखें. अग्नि पंचक आपकी हेल्थ पर भी असर डालता है. इसे अंधविश्वास की तरह न लें. बल्कि इसे साइंटिफिकली सोचें और देखें कि इस दौरान वैसे भी मौसम बदल रहा है. दिन में अधिक गर्मी और शाम होते है ठंड का असर और इन दोनों के कारण तबीयत खराब हो सकती है. बेवजह की यात्राओं से बचें. जरूरी हो तभी निकलें. चंद्रमा और सूर्य की बदल रही गति के कारण मन भी अस्थिर होता है.
सबसे आखिरी बात कि पैसों का सोच-समझकर इस्तेमाल करें.
अग्नि पंचक खत्म होते ही होलाष्टक शुरू हो जाएंगे. होली के पहले का ये आठ दिन का समय भी अशुभ माना जाता है. इस दौरान भी खुद का बचाव करना ही चाहिए. होलाष्टक खत्म होने के बाद पूर्णिमा का दिन आएगा और इसी दिन चंद्रग्रहण है. होलिका दहन का दिन भी चिता सूचक होता है. इसलिए इसे भी शुभ नहीं माना जाता है.
दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
अब दो ग्रहण का असर देश-दुनिया के हिसाब से देखें तो, ग्रहों की चाल के अनुसार 23 फरवरी 2026 से 2 अप्रैल 2026 तक राहु-मंगल की युति होगी. ज्योतिष में इसे अंगारक योग कहा जाता है. जिसे वैदिक ज्योतिष में 'तत्काल प्रतिक्रिया और तनाव से भरा समय माना जाता है. 2026 की शुरुआत में राहु कुंभ राशि और शनि मीन राशि में रहेंगे.
इस दौरान 23 फरवरी को मंगल कुंभ राशि में जाकर राहु के साथ अंगारक योग बनाएंगे. फिर 2 अप्रैल को जब मंगल मीन राशि में जाएंगे तो वहां शनि के साथ युति बनाएंगे. यह युति 11 मई तक रहने वाली है. ज्योतिषविदों का कहना है कि मंगल का राहु और शनि के साथ जुड़ना चार राशियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. यह योग व्यक्तिगत तौर पर तो असर डालेगा ही, इसका असर वर्ल्ड लीडर्स पर भी पड़ेगा जो इस संबंधित राशि से जुड़े होंगे.
एक ही महीने के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण
साल 2026 में कुल चार ग्रहण होने वाले हैं. पहला ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने वाला है जो कि सूर्य ग्रहण होगा. इसके बाद दूसरा ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने वाला है जो कि पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. ज्योतिष में ग्रहणों को ऊर्जा परिवर्तन और सामाजिक अस्थिरता के संकेत से जोड़ा जाता है. हालांकि 17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा.
यह अफ्रीकी देशों के आसमान पर नजर आएगा. वहीं होलिका दहन के दिन लगने वाला चंद्रग्रहण भारत में नजर आएगा. ये दोनों सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण लगभग 15 दिनों के अंतराल पर और एक महीने के भीतर लगने वाले हैं. ज्योतिष में इस स्थिति को अच्छा नहीं माना जाता है. एक महीने में दो ग्रहणों के लगातार पड़ने से भीषण टकराव और रक्तपात के संयोग बनते हैं.
ज्योतिष में मंगल-राहु, सूर्य-राहु जैसे संयोगों को 'तत्काल निर्णय, संघर्ष और सत्ता दबाव' के संकेत माना जाता है, जिसका असर राजनीतिक नेतृत्व पर देखा जा सकता है. ग्रहणों की तारीखें (17 फरवरी, 3 मार्च) ज्योतिष में 'राजा-प्रजा टकराव', आर्थिक स्थिरता और सैन्य संतुलन पर निगेटिव असर के संकेत देती हैं. कुछ राशियों के लिए 13-15 जनवरी के आसपास 'शुक्र-मंगल युति' शुभ फल लाएगी, हालांकि इससे संघर्ष की ऊर्जा भी बन सकती है.
डिस्क्लेमर- यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं, शास्त्रीय व्याख्याओं और परंपरागत विश्वासों पर आधारित है. इसे किसी भी प्रकार की निश्चित भविष्यवाणी, वैज्ञानिक अनुमान या तथ्यात्मक दावा नहीं माना जाना चाहिए.
विकास पोरवाल