मां के नौ रूपों की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्र जल्द ही शुरू होने वाले हैं. इस साल चैत्र नवरात्र 6 अप्रैल से शुरू होकर 14 अप्रैल तक पूरे 9 दिन तक रहेंगे. इन नौ दिनों में माता के भक्त मां को खुश करने के लिए उनके नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं. नवरात्रि के व्रत में कलश स्थापना का खास महत्व होता है. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कलश की स्थापना हमेशा उचित मुहूर्त में ही करनी चाहिए.आइए जानते हैं इस साल नवरात्रि घटस्थापना के लिए सबसे श्रेष्ठ और उत्तम मुहूर्त कौन सा है और इसकी स्थापना विधि के क्या हैं खास नियम?
नवरात्रि कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 2019
इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सिर्फ 4 घंटे 10 मिनट तक ही रहेगा. कलश स्थापना मुहूर्त सुबह 06 बजकर 09 मिनट से लेकर 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. कलश स्थापना का यह मुहूर्त इसलिए भी शुभ है क्योंकि इस समय द्विस्वभाव मीन लग्न होगा.
क्यों की जाती है घट स्थापना
हिंदू धर्म के अनुसार नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी मां की आराधना करने से मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है. घट स्थापना का मतलब है कलश की स्थापना करना.
नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना-
नवरात्र
के पहले दिन स्नान करने के बाद माता दुर्गा, भगवान गणेश, नवग्रह कुबेरादि
की मूर्ति के साथ कलश स्थापना करें. कलश के ऊपर रोली से ॐ लिखकर स्वास्तिक
बनाएं. कलश स्थापन के समय अपने मंदिर के पूर्व कोण की तरफ या घर के आंगन से
पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर 7 तरह के अनाज रखें.
नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना-
-संभव हो, कलश
स्थापना करते समय नदी की रेत का उपयोग करें. इस रेत में जौ भी डालें. इसके
उपरांत कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन,
अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें. फिर 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को
सात अनाजों के साथ रेत के ऊपर स्थापित करें.
नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना-
-अब कलश में थोड़ा सा गंगाजल डालते हुए 'ॐ वरुणाय नमः' कहें और कलश को जल से भर दें. इसके बाद आम का पल्लव कलश के ऊपर रखने के बाद जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें. अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें.
नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना-
इसके बाद हाथ में हल्दी, अक्षत पुष्प लेकर इच्छित संकल्प लें. इसके बाद 'ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः! दीपो हरतु मे पापं पूजा दीप नमोस्तु ते. मंत्र का जाप करते दीप पूजन करें. कलश पूजन के बाद नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे!' से सभी पूजन सामग्री अर्पण करते हुए मां शैलपुत्री की पूजा करें.
कलश स्थापना से जुड़े खास नियम-
-कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए.
-कलश स्थापना करने के लिए पूजन स्थल से अलग एक पाटे पर लाल व सफेद कपड़ा बिछाएं. इस पर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर जल से भरा कलश स्थापित करें.
-कलश का मुंह खुला ना रखें, उसे किसी चीज से ढक देना चाहिए. अगर -कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें.
कलश स्थापना से जुड़े खास नियम-
-अगर कलश की स्थापना कर रहे हैं, तो दोनों समय मंत्रों का जाप करें, चालीसा या सप्तशती का पाठ करना चाहिए.
-पूजा करने के बाद मां को दोनों समय भोग लगाएं, सबसे सरल और उत्तम भोग हैं लौंग और बताशा माना जाता है.
-मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है, पर मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्कुल ना चढ़ाएं.
कलश स्थापना से जुड़े खास नियम-
-नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिन तक अपना खान-पान और आहार सात्विक रखें.
-इस कलश में शतावरी जड़ी, हलकुंड, कमल गट्टे व रजत का सिक्का डालें. -पूजा करते समय दीप प्रज्ज्वलित करके अफने इष्ट देव का ध्यान करें. तत्पश्चात देवी मंत्र का जाप करें.
-अब कलश के सामने गेहूं व जौ को मिट्टी के पात्र में रोपें. इस ज्वारे को माताजी का स्वरूप मानकर पूजन करें.अंतिम दिन ज्वारे का विसर्जन करें.