सुपरस्टार थलपति विजय ने फिल्मी पर्दे के बाद राजनीति के मैदान पर भी अपना जलवा कायम रखा है. 'तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026' में विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) ने बड़ी बढ़त के साथ जीत हासिल की है. खबर लिखे जाने तक TVK ने 107 सीटों पर बढ़त बनाई हुई है. चुनावी नतीजों के बीच सोशल मीडिया पर विजय खूब ट्रेंड भी कर रहे हैं. चूंकि विजय की मां हिंदू और पिता ईसाई धर्म से ताल्लुक रखते हैं. इसलिए लोग उनकी आस्था को भी इंटरनेट पर खंगालने लगे हैं.
थलपति विजय ने करीब चार साल पहले एक इंटरव्यू में अपनी आस्था को लेकर खुलकर बात की थी. उन्होंने कहा था कि ईश्वर पर उन्हें पूरा भरोसा है. उन्हें चर्च, मंदिर और दरगाह हर पवित्र स्थल पर जाना अच्छा लगता है. इसी इंटरव्यू में विजय ने बताया था कि उनके पिता ईसाई हैं और मां हिंदू धर्म से ताल्लुक रखती हैं. उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया और दोनों ने लव मैरिज कर ली. उन्होंने बताया कि अलग-अलग धर्म का होने के बावजूद मेरे माता-पिता ने मुझ पर कभी मंदिर या चर्च जाने का दबाव नहीं बनाया. उन्होंने मुझसे कभी नहीं कहा कि मैं या तो सिर्फ मंदिर जाऊं या फिर चर्च. यही बात मैं भी अपने बच्चों से कहता हूं.
इस इंटरव्यू में थलपति विजय ने यह भी बताया कि वह जॉर्जिया में एक जगह ठहरे थे, जहां पास में एक चर्च था. जब उन्होंने वो चर्च देखा तो वह वहां गए. जबकि चेन्नई में वह जल्दी किसी चर्च में नहीं जाते हैं.
मां के लिए बनवाया साईं बाबा का मंदिर
थलपति विजय की मां शोबा चंद्रशेखर साईं बाबा की बड़ी भक्त हैं. उनकी एक तमन्ना था कि वह साईं बाबा का मंदिर बनवाएं. विजय ने एक संस्कारी बेटे की तरह कर्तव्य निभाते हुए चेन्नई में साईं बाबा का बड़ा भव्य मंदिर बनवा दिया. विजय की मां के लिए यह पवित्र स्थान एक मंदिर से कहीं ज्यादा है. वो इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना बताती थीं, जिसे विजय ने सच कर दिखाया.
थलपति विजय द्वारा बनवाया गया साईं बाबा मंदिर चेन्नई के कोरत्तुर में स्थित है. मंदिर में साईं बाबा के अलावा गणपति महाराज और हनुमान जी के पूजन स्थल भी बनाए गए हैं. इस मंदिर में भक्त दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं. मंदिर में सुबह 6 बजे आरती होती है. फिर सुबह 7 बजे भगवान का अभिषेक किया जाता है. मंदिर में सुबह से रात तक चार अलग-अलग पहर की आरती होती है.
इतना ही नहीं, हिंदू मान्यताओं के अनुसार जब कोई व्यक्ति 60 या 80 वर्ष का होता है तो उसके लिए मंदिर में विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं. विजय के पिता एक कैथोलिक क्रिश्चियन हैं. लेकिन जब वो 80 वर्ष के हुए तो विजय ने तिरुकाडैयूर अमृतेश्वर मंदिर में उनके लिए शांति पूजा का आयोजन किया था. इसे लेकर विजय के पिता ने कहा था कि उनके घर में एक मंदिर भी है और वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं.
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