Somvati Amavasya 2026: 15 जून को साल की पहली सोमवती अमावस्या, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन 15 जून 2026, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर होगा. उदिया तिथि के आधार पर 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी. चूंकि इस दिन सोमवार है, इसलिए इसे विशेष रूप से शुभ और पुण्य फलदायी माना गया है.

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जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है.

प्रवीण मिश्र, ज्योतिषी

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:58 PM IST

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है. 15 जून को साल की पहली सोमवती अमावस्या है. इसे अत्यंत पुण्यदायी और भगवान शिव व माता पार्वती की विशेष कृपा दिलाने वाला दिन माना गया है. गया है. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने इस सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि बताई है.

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कब है सोमवती अमावस्या?
अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन 15 जून 2026, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर होगा. उदिया तिथि के आधार पर 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी. चूंकि इस दिन सोमवार है, इसलिए इसे विशेष रूप से शुभ और पुण्य फलदायी माना गया है.

सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04.02 बजे से सुबह 04.42 बजे तक
गोधुली मुहूर्त- शाम 07.17 बजे से शाम 07.37 बजे तक

क्यों खास है यह अमावस्या?
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने बताया कि सोमवार का संबंध भगवान शिव से होता है. ऐसे में सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है. सोमवती अमावस्या पर किया गया दान-पुण्य भी विशेष फलदायी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कर्मों का पुण्य कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है.

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सोमवती अमावस्या की पूजन विधि
इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद निकट के शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करना शुभ माना जाता है. भगवान शिव का जल और गाय के कच्चे दूध से अभिषेक किया जा सकता है. पूजा में बेलपत्र, अक्षत और तिलक अर्पित कर आरती करनी चाहिए. साथ ही मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए.

दान का महत्व
सोमवती अमावस्या पर दान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान बताया गया है. जरूरतमंद लोगों को चावल, दाल, आटा, नमक, फल, सब्जियां, वस्त्र और दक्षिणा का दान किया जा सकता है. इसके अलावा, पवित्र नदी में स्नान कर दान करना भी शुभ माना गया है. कई लोग इस दिन अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म भी करते हैं.

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