Shukra Rahu Yuti 2026: शुक्र-राहु का लम्पट योग! बढ़ेंगे खर्चे या होगा धन लाभ? ज्योतिषाचार्या ने बताया

धन, वैभर और सुखों के मालिक शुक्र ग्रह 6 फरवरी को पाप ग्रह राहु के साथ कुंभ राशि में युति करने वाले हैं. इन दोनों ग्रहों के मिलन से यहां लम्पट योग बनेगा. आइए जानते हैं कि इस योग को लेकर ज्योतिष शास्त्र क्या कहता है.

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अगर शुक्र-राहु की युति में अनियंत्रित इच्छाएं शामिल हो जाएं तो व्यक्ति बुरी संगत, बदनामी, चरित्रहीन और आर्थिक तंगी का शिकार हो सकता है. (Photo: ITG) अगर शुक्र-राहु की युति में अनियंत्रित इच्छाएं शामिल हो जाएं तो व्यक्ति बुरी संगत, बदनामी, चरित्रहीन और आर्थिक तंगी का शिकार हो सकता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

Shukra Rahu Yuti 2026: 6 फरवरी को शुक्र कुंभ राशि में गोचर करेंगे. यहां शुक्र-राहु की युति से लम्पट योग बनेगा. अक्सर शुक्र-राहु के लम्पट योग से लोगों के मन में डर और चिंता देखी जाती है. जबकि इससे घबराना व्यर्थ है. यदि लोग अपनी इच्छाओं और भावनाओं पर नियंत्रण करना सीख लें तो शुक्र राहु का यह योग अपार धन प्रदान करने के साथ मान-सम्मान भी बढ़ा सकता है. बस आपको अपनी गलत इच्छाओं का गुलाम बनने से बचना होगा.

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अगर शुक्र-राहु की युति में अनियंत्रित इच्छाएं शामिल हो जाएं तो व्यक्ति गलत संगत, बदनामी, चरित्रहीन और आर्थिक तंगी का शिकार हो सकता है. लम्पट योग आपको सच्चा प्रेमी, नैतिक रूप से कमाए धन का स्वामी या अनैतिकता से कमाए अपार धन का मालिक दोनों बना सकता है. इसलिए शुक्र-राहु की इस युति का परिणाम आपकी जीवनशैली और व्यक्तित्व पर निर्भर करता है.

क्या है शुक्र-राहु की युति?
जब शुक्र और राहु एक ही राशि में हों तो लम्पट योग बनता है. लेकिन एक दूसरे से त्रिकोण में या ठीक सामने वाले भाव में हों तो भी शुक्र राहु की युति अपना प्रभाव दिखा सकती है. शुक्र ग्रह प्रेम, सौन्दर्य और वैभवता के कारक हैं. जबकि राहु भ्रम, विस्तार और परंपराओं से हटकर काम करने का कारक ग्रह है. शुक्र और राहु की युति वाले लोग भौतिकता की ओर अधिक आकर्षित होते हैं.

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शुक्र के साथ राहु का होना आकर्षण और इच्छाओं को बढ़ा देती है. व्यक्ति में पैसा और प्रेम पाने की अपार इच्छा जागृत हो जाती है. पैसे और प्रेम के प्रति व्यक्ति की इच्छा कभी कम नहीं होती है. व्यक्ति इन चीजों को प्राप्त भी करता है, लेकिन किस रास्ते पर चलकर? यह व्यक्ति की संगति और बुद्धि निर्धारित करती है. इसलिए इस युति में जातक ने अपनी इच्छाओं को नियंत्रित न किया और गलत संगति को चुना तो मुश्किल बढ़ सकती है. वहीं, सही संगति का चुनाव और नैतिकता से कार्य करने वालों को यह योग सकारात्मकता प्रदान करता है. 

कब नुकसान या लाभ देती है शुक्र-राहु की युति?
शुक्र-राहु ग्रह की युति किस भाव में बन रही है, यह बात भी फलित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. यदि दोनों ग्रहों की स्थिति में 10 डिग्री से ज्यादा का अंतर है तो इसे बलि युति नहीं कहा जाएगा. यानी इसका परिणाम उतना प्रभावी नहीं होगा, जितना 5 डिग्री के अंतराल में होगा. वहीं शुक्र अपनी उच्च राशि, मित्र राशि या स्वयं की राशि में बलि होकर बैठा है तो भी योग अच्छे परिणाम देता है. राहु और शुक्र दोनों ही अच्छी स्थिति में हैं तो व्यक्ति महत्वाकांक्षी, कलात्मक और कामयाब बनता है. इसके विपरीत नीच व शत्रु राशि में शुक्र कमजोर और राहु बलि हो तो व्यक्ति को अपने जीवन में शुक्र से संबंधित निर्णय सावधानी से लेने चाहिए. यह आपको गलत संगति, अनैतिकता, किसी गलत नशे की लत की ओर ले जा सकता है.

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क्या है उपाय?
शुक्र राहु की युति वालों को नियमित शिवजी की पूजा करनी चाहिए. प्रतिदिन कम से कम 14 मिनट ध्यान अवश्य करें, जिससे आपकी नैतिकता और संगति अच्छी बनी रहे.

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