Holika Dahan Shubh Muhurt: आज रात इतने बजे होगा होलिका दहन का शुभ मुहूर्त? हल्की पड़ जाएगी भद्रा

Holika Dahan 2026: होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा पर करने की परंपरा है. इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट से लेकर अगले दिन 3 मार्च को सुबह 5 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में 2 मार्च की मध्य रात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच जब भद्रा पुच्छकाल रहेगा, तब आप होलिका दहन कर सकते हैं.

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पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री का कहना है कि इस वर्ष होलिका दहन 2 और 3 मार्च की दरमियानी रात करना ही सबसे सही समय होगा. (Photo: ITG) पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री का कहना है कि इस वर्ष होलिका दहन 2 और 3 मार्च की दरमियानी रात करना ही सबसे सही समय होगा. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:54 PM IST

Holika Dahan Shubh Muhurt: इस साल होलिका दहन की तारीख को लेकर बड़ा भ्रम फैल रहा है. कोई 2 मार्च तो कोई 3 मार्च को होलिका दहन बता रहा है. ये सारा भ्रम भद्रा काल और साल के पहले चंद्र ग्रहण के कारण फैला है. हालांकि पंडितों ने पंचांग देखकर सही तारीख स्पष्ट कर दी है. आइए आपको बताते हैं कि होलिका दहन की सही तारीख और शुभ मुहूर्त क्या है. लेकिन इससे पहले आपको भद्रा काल और चंद्र ग्रहण की तारीख और समय का पता होना जरूरी है.

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कब है भद्रा काल?
हिंदू पंचांग के अनुसार, भद्रा काल 2 मार्च की शाम 5 बजकर 45 मिनट से लेकर 3 मार्च की सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगा.

कब लगेगा चंद्र ग्रहण?
साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देने वाला है. इसलिए इसका सूतक काल 9 घंटे पहले यानी 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर आरंभ हो जाएगा.

फाल्गुन पूर्णिमा तिथि
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा पर करने की परंपरा है. इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 3 मार्च को 5 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में होलिका दहन के लिए 2 मार्च यानी आज का दिन ही सबसे उपयुक्त माना जा रहा हैय

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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है?
ज्योतिषाचार्य पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री का कहना है कि इस वर्ष होलिका दहन 2 और 3 मार्च की दरमियानी रात करना ही सबसे सही समय होगा. इस समय आपको पूर्णिमा तिथि भी मिलेगी और भद्रा का प्रभाव भी हल्का रहेगा. उन्होंने कहा कि आप भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन कर सकते हैं. 2 मार्च की मध्य रात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच भद्रा पुच्छकाल रहेगा. इसी वक्त होलिका दहन करना सबसे श्रेष्ठ माना जा रहा है.

एक अन्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने हृषीकेश पंचांग का हवाला देते हुए कहा कि 2 मार्च की रात निशाव्यापिनी पूर्णिमा तो मिलेगी. लेकिन शाम के समय भद्रा काल भी प्रारंभ हो जाएगा. लेकिन आप भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा पुच्छ काल में होलिका दहन कर सकते हैं. भद्रा पुच्छ काल 2 मार्च की मध्यरात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच होगी. इस समय होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है.

क्या 3 मार्च को भी कर सकते हैं होलिका दहन?
पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है. मगर 3 मार्च की शाम ‘ग्रस्तोदित’ चंद्र ग्रहण लग रहा है. यह चंद्र ग्रहण दोपहर 03.20 बजे से लेकर शाम 06.47 बजे तक रहेगा. ऐसे में आप चाहें तो 3 मार्च की शाम ग्रहण समाप्त होने के बाद भी होलिका दहन कर सकते हैं. इसके बाद अगले दिन सुबह 4 मार्च को रंग वाली होली खेल सकते हैं.

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