Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू नववर्ष 'रौद्र' में कैसा है ग्रहों का मंत्रिमंडल, ज्योतिषविद ने कही ये डराने वाली बात

19 मार्च से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होने जा रही है. इस संवत के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे. बृहस्पति के राजा होने से स्थितियां थोड़ी बेहतर होंगी. हालांकि मंत्री मंगल होने से जन साधारण को समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है.

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इस साल नव संवत्सर 19 मार्च से आरंभ हो रहा है. (Photo: ITG) इस साल नव संवत्सर 19 मार्च से आरंभ हो रहा है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:55 PM IST

Hindu Nav Vasrsh 2026: हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है. इसे नव संवत्सर भी कहा जाता है. चूंकि इसका निर्माता विक्रमादित्य को बताया जाता है. इसलिए इसे विक्रम संवत भी कहा जाता है. इस दिन से वासंतिक नवरात्र यानी चैत्र नवरात्र भी शुरू होते हैं. लगभग इसी समय से सूर्य भचक्र की पहली राशि मेष में गोचर करते हैं. यही वो समय होता है जब ऋतुओं और प्रकृति में बड़े स्तर बदलाव होता है. इस साल नव संवत्सर 19 मार्च से आरंभ हो रहा है. इस हिंदू नववर्ष में ग्रहों के मंत्रिमंडल को लेकर एक परेशान करने वाली बात सामने आ रही है.

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हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाले नवसंवत का एक विशेष नाम और फल होता है. पूरे संवत के लिए ग्रहों का एक विशेष मंत्रिमंडल भी तय होता है. ग्रहों के इसी मंत्रिमंडल की तर्ज पर पूरे साल के शुभ और अशुभ फल तय होते हैं. मसलन, मौसम कैसा रहेगा. अर्थव्यवस्था कैसी होगी. लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. यहां तक कि सुरक्षा, कृषि और व्यवहार ये सब ग्रहों की चाल के लिहाज से ही तय होता है.

इस बार नव संवत्सर में ग्रहों का मंत्रिमंडल कैसा है?
पंडित शैलेंद्र पांडेय के मुताबिक, यह विक्रम संवत 2083 है. इसका नाम 'रौद्र' है. इस संवत के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे. बृहस्पति के राजा होने से स्थितियां थोड़ी बेहतर होंगी. धर्म, शिक्षा और कानून के मामलों में तेजी से सुधार होगा. मंत्री मंगल होने से जन साधारण को समस्या होगी. अग्नि भय, युद्ध और दुर्घटनाओं की स्थिति निरंतर बनी रह सकती है. मेघेश चन्द्रमा हैं. इसलिए वर्षा की स्थिति थोड़ी बेहतर रह सकती है.

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नवसंवत के पहले दिन क्या करना चाहिए?
नवसंवत के पहले दिन सवेरे-सवेरे स्नानादि के बाद सूर्य को अर्घ्य दें. फिर घर के मेन गेट पर अशोक के पत्तों का वंदनवार लगाएं. अपने इष्ट देवों या भगवान का स्मरण करें. इसके बाद हाथ में पुष्प, अक्षत और जल लेकर नवसंवत की पूजा करें. इस दौरान ईश्वर से प्रार्थना करें कि आने वाला नवसंवत आपके परिवार के लिए मंगलकारी सिद्ध हो.

नवसंवत के पहले दिन नीम के कोमल पत्तों और ऋतुकाल के पुष्पों का चूर्ण बनाएं. इसमें काली मिर्च, नमक, हींग, जीरा, मिश्री, इमली और अजवायन मिलाकर ग्रहण करें. मान्यता है कि इस उपाय को करने से रक्त विकार या अन्य शारीरिक रोगों को दूर रखा जा सकता है. इस एक उपाय को करने से पूरे साल स्वास्थ्य ठीक रहता है. इस दिन घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने पर जोर दें.

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