‘बम-बम भोले’ के जयकारों के बीच श्रद्धालु गोपीनाथ मंदिर से बाबा रुद्रनाथ की उत्सव डोली लेकर रवाना हुए. पंच केदारों में चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली आज गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर से अपने मूल धाम रुद्रनाथ के लिए आगे बढ़ी. इस बीच वैदिक मंत्रोच्चार, ढोल-दमाऊ की गूंज, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन और भारतीय सेना के बैंड की प्रस्तुति के बीच पूरा गोपेश्वर शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया.
भगवान रुद्रनाथ की डोली प्रस्थान के साथ ही पंच केदार यात्रा का शुभारंभ हो गया है. मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, हर वर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर पंचांग गणना के आधार पर कपाट खुलने की तिथि तय होती है. परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ संक्रांति पर विग्रह को गर्भगृह से बाहर लाया गया था और 15-16 मई तक गोपीनाथ मंदिर में भक्तों के दर्शनार्थ रखा गया. 17 मई को पूरे विधि-विधान के साथ डोली मूल धाम के लिए प्रस्थान कर गई. अब 18 मई को ब्रह्म मुहूर्त में रुद्रनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे.
क्या है पंच केदार?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव पाप मुक्ति के लिए भगवान शिव की खोज में हिमालय आए थे. शिवजी ने बैल का रूप धारण किया और उनके शरीर के विभिन्न अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें पंच केदार कहा जाता है. रुद्रनाथ एकमात्र ऐसा धाम है जहां भगवान शिव के मुख की स्वयंभू मूर्ति की पूजा होती है.
समुद्र तल से लगभग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर सबसे दुर्गम पंच केदार माना जाता है. शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और भगवान की पूजा गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में की जाती है. अब ग्रीष्म काल की शुरुआत के साथ बाबा रुद्रनाथ फिर अपनी हिमालयी चोटियों पर विराजमान होने जा रहे हैं. वहीं, आज डोली रवाना होने के अवसर पर गोपेश्वर में भक्तों में अपार उत्साह और श्रद्धा का भाव देखने को मिला. बाबा रुद्रनाथ के दर्शन और आशीर्वाद पाने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे थे.
कमल नयन सिलोड़ी