Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण, भारत में सुबह इतने बजे शुरू हो जाएगा सूतक काल

Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को लगने वाला ग्रहण यह एक खण्डग्रास चंद्र ग्रहण है. भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा और शाम को 6 बजकर 46 मिनट पर इसका समापन हो जाएगा. साल के इस पहले चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट तक रहेगी.

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3 मार्च को चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले भारत में सूतक काल भी लागू हो जाएगा. (Photo: ITG) 3 मार्च को चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले भारत में सूतक काल भी लागू हो जाएगा. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:18 PM IST

Chandra Grahan 2026: साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने वाला है. यह साल का पहला चंद्र ग्रहण है, जो सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जगह बनाएगा. संयोगवश इस दिन शाम के वक्त जगह-जगह होलिका दहन भी होगा. यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला है. इसलिए इसका महत्व और भी ज्यादा है. चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले भारत में सूतक काल भी लागू हो जाएगा, जिसमें शुभ मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे. आइए जानते हैं कि इस चंद्र ग्रहण का समय क्या रहने वाला है और भारत में इसका सूतक काल कितने बजे लागू हो जाएगा.

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कितने बजे शुरू होगा चंद्र ग्रहण?
यह एक खण्डग्रास चंद्र ग्रहण है. भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो जाएगा और शाम को 6 बजकर 46 मिनट पर इसका समापन हो जाएगा.

चंद्र ग्रहण की अवधि कितनी है?
साल के इस पहले चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट तक रहेगी.

चंद्र ग्रहण का सूतक काल कितने बजे शुरू होगा?
3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले लागू हो जाएगा. इस गणना के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लागू हो जाएगा.

सूतक में कौन से काम नहीं
चंद्र ग्रहण के सूतक काल में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं. इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं. ताकि पूजा करने वाले लोग भगवान की प्रतिमा और शुभ चिह्नों को स्पर्श न कर सकें. इस समय खाना पकाना या भोजन करना भी वर्जित माना गया है. इसमें पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ या नए काम की शुरुआत आदि नहीं करनी चाहिए. 

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चंद्र ग्रहण इतना ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों है?
नवग्रहों में सूर्य के बाद ज्योतिष में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह चंद्रमा ही है. ज्योतिष में चंद्रमा के बिना कोई गणना नहीं होती है. इसलिए चंद्रमा का ज्योतिष में एक प्रमुख स्थान दिया गया है. वैज्ञानिक दृष्टीकोण से चंद्रमा गुरुत्वाकर्षण शक्ति और सारी पृथ्वी के जल तत्व को नियंत्रित करता है. यह पृथ्वी के सर्वाधिक निकट है. इसलिए यह पृथ्वी को सीधी तौर से प्रभावित करता है. चंद्रमा पर घटने वाली हर छोटी बड़ी घटना का पृथ्वी पर प्रभाव जरूर पड़ता है. और ग्रहण जैसी बड़ी घटना का प्रभाव तो निश्चित तौर पर होता है. हर व्यक्ति का मन और भावनाएं चंद्रमा का ही क्षेत्र है. इसलिए चंद्रमा पर परिवर्तन से इंसान का मन तुरंत प्रभावित हो जाता है.

कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?
ज्योतिषविदों के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा. लेकिन ग्रहण का दृश्य हर स्थान पर एक जैसा नहीं होगा. यह ग्रहण देश के सुदूर पश्चिमी भाग के कुछ स्थानों को छोड़कर भारत के अधिकांश स्थानों से दिखाई देगा. इस दिन शाम को ग्रहण शुरू होगा. उत्तर-पूर्व भारत व अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ स्थानों को छोड़कर भारत के अधिकांश स्थानों पर चंद्रोदय के समय चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. इसके अलावा, यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा.

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इस चंद्र ग्रहण में किन नियमों का पालन करें?
यह खग्रास चंद्र ग्रहण है, जो भारत में दृष्यमान होगा. ऐसे में सूतक से लेकर ग्रहण काल समाप्त होने तक भोजन, पूजा-पाठ और कई कार्यों की मनाही होगी. इस समय मंदिरों में पूजा-पाठ नहीं होगा. गर्भवती महिलाओं को इस काल में विशेष सावधानी रखनी होगी. वृद्धजनों और बच्चों का भी विशेष ख्याल रखना होगा.
 

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