नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है. इसी के साथ ही शुरू हो जाएगी देवी के अलग-अलग रूपों की उपासना. आज नवरात्रि का पहला दिन है और पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है. देवी के इस रूप की उपासना से कौन-कौन से वरदान पाए जा सकते हैं और कैसे करें मां शैलपुत्री की दिव्य उपासना आइए हम आपको बताते हैं...
क्या है और इस दिन देवी के किस स्वरुप की उपासना की जाती है ?
- वर्ष में चार बार पड़ती है - माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन
- से वातावरण के तमस का अंत होता है और सात्विकता की शुरुआत होती है
- मन में उल्लास , उमंग और उत्साह की वृद्धि होती है
- दुनिया में सारी शक्ति, नारी या स्त्री स्वरुप के पास ही है , इसलिए इसमें देवी की उपासना ही की जाती है
- के प्रथम दिन देवी के शैलपुत्री स्वरुप की उपासना की जाती है
- इनकी उपासना से देवी की कृपा तो मिलती ही है साथ में सूर्य भी काफी मजबूत होता होता है
- सूर्य सम्बन्धी जैसी भी समस्या हो आज के दिन दूर की जा सकती है
- इस बार नवरात्रि का प्रथम दिन 21 मार्च को होगा
के और कलश स्थापना के नियम क्या हैं ?
- में जीवन के समस्त भागों और समस्याओं पर नियंत्रण किया जा सकता है
- के दौरान हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए
- नियमित खान पान में जौ और जल का प्रयोग जरूर करना चाहिए
- इन दिनों तेल,मसाला,और अनाज कम से कम खाना चाहिए
- कलश की स्थापना करते समय जल में सिक्का डालें
- कलश पर नारियल रक्खें , और कलश पर मिट्टी लगाकर जौ बोयें
- कलश के निकट अखंड दीपक जरूर प्रज्ज्वलित करें
अगर सूर्य कमजोर है या सूर्य से समस्या है तो इसके लक्षण क्या हैं ?
- व्यक्ति को हड्डियों और हृदय के रोग होने की समभावना होती है
- राज्य से दंड या कारावास की स्थिति बन जाती है
- पिता पुत्र में सम्बन्ध कभी अच्छे नहीं होते
- ऐसी स्थिति में व्यक्ति को नाम यश नहीं मिलता , अक्सर अपयश का शिकार होता है
के पहले दिन क्या करें उपाय कि सूर्य मजबूत हो जाय ?
- दोपहर के समय लाल वस्त्र धारण करें
- देवी को लाल फूल और लाल फल अर्पित करें
- देवी को ताम्बे का सिक्का भी अर्पित करें
- इसके बाद पहले देवी के मंत्र "ॐ दुं दुर्गाय नमः "का जाप करें
- फिर सूर्य के मंत्र "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः" का कम से कम तीन माला जाप करें
- ताम्बे का छल्ला , अनामिका अंगुली में धारण करें
वंदना भारती