उल्लू के पंजे, सूअर के दांत और कस्तूरी... सोशल मीडिया पर 50 हजार से 3 लाख में तंत्र पैकेज बेचने की कहानी

उल्लू के पंजे, जंगली सूअर के दांत और कस्तूरी..! ये सबकुछ लाखों की कीमत में बेचा जा रहा था. बेचने वाला खुद को सोशल मीडिया पर वास्तु और एनर्जी गुरु बताता था. वह जिंदगी और कारोबार चमका देने के दावे के साथ लाखों के तंत्र-मंत्र पैकेज बेचता था. अब महीनों की निगरानी के बाद इस आरोपी को राजस्थान में पकड़ लिया गया है.

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सोशल मीडिया पर खुद को एनर्जी गुरू बताता था आरोपी. (Photo: AI-generated) सोशल मीडिया पर खुद को एनर्जी गुरू बताता था आरोपी. (Photo: AI-generated)

aajtak.in

  • जयपुर,
  • 10 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 8:55 AM IST

यह कहानी राजस्थान के जयपुर की है. यहां एक व्यक्ति खुद को 'वास्तु और एनर्जी गुरु' बताकर सोशल मीडिया पर लोगों का भरोसा जीतता है. वह अपने पोस्ट और वीडियो में ऐसे उपाय सुझाता, जो व्यापार में सफलता और जीवन में समृद्धि दिलाने का दावा करते. लेकिन इसके पीछे वह अलग खेल कर रहा था. दरअसल, वह प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंगों की तस्करी कर रहा था.

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एजेंसी के अनुसार, राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मांडरेला के रहने वाले साहिल गौड़ उर्फ साहिल शर्मा को वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), दिल्ली और झुंझुनूं वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया है. उस पर छह महीने तक नजर रखी गई. जब वह झुंझुनूं रेलवे स्टेशन पर एक डिकॉय कस्टमर को प्रतिबंधित सामान की डिलीवरी करने पहुंचा, तो उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया.

असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (ACF) हरेंद्र सिंह के अनुसार, आरोपी साहिल गौड़ के पास से करीब 20 लाख रुपये कीमत का अवैध सामान बरामद हुआ है. इसमें उल्लू के पंजे, जंगली सूअर के दांत और कस्तूरी की गुठलियां (musk pods) शामिल हैं. ये सभी वन्यजीव अंग भारत के वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं.

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जांच से खुलासा हुआ कि साहिल सोशल मीडिया पर इंस्टाग्राम अकाउंट्स चलाता था, वहां वह खुद को वास्तु और एनर्जी गुरु के रूप में पेश करता और दावा करता था कि उसके पास ऐसे चार्म्स हैं, जो कारोबार को चमका देंगे और जीवन में सुख-समृद्धि लाएंगे. वह अपने ग्राहकों को विशेष तंत्र पैकेज बेचता था, जिनकी कीमत 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक होती थी. इन पैकेजों में असल में वन्यजीवों के अंग शामिल रहते. उसके ग्राहक केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक फैले हुए थे.

शातिर नेटवर्क और महाराष्ट्र तक कनेक्शन

अधिकारियों ने यह भी बताया कि साहिल महाराष्ट्र में सक्रिय एक बड़े वन्यजीव तस्कर के साथ मिलकर काम करता था. वह ऑनलाइन डिलीवरी और पर्सनल नेटवर्क के जरिए ग्राहकों तक ये अवैध सामान यानी वाइल्डलाइफ प्रोडक्ट पहुंचाता था. सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान और गुरु का चोला ओढ़कर उसने एक ऐसा जाल रचा था, जिसमें न जाने कितने लोग उलझ चुके थे.

गुप्त निगरानी और फिर एक्शन

पिछले छह महीनों से WCCB और झुंझुनूं वन विभाग लगातार उस पर निगरानी रख रहे थे. उसके हर ऑनलाइन मूवमेंट और संदिग्ध लेन-देन की जानकारी जुटाई गई. आखिरकार पूरी तैयारी के तहत उसे झुंझुनूं रेलवे स्टेशन पर पकड़ा गया, जब वह पुलिस के द्वारा भेजे गए नकली ग्राहक को माल सौंपने आया था. जैसे ही अधिकारियों ने छापा मारा, उसके पास से प्रतिबंधित सामग्री बरामद हुई. सामान देखकर खुद अधिकारी भी चौंक गए, क्योंकि वन्यजीवों के अंग खुलेआम बिक रहे थे और ग्राहक अंधविश्वास में इन्हें खरीद रहे थे.

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यह मामला केवल अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की अंधी दौड़ का भी नतीजा है. लोग समृद्धि और सफलता पाने के लिए ऐसे गुरुओं पर विश्वास कर अपनी जेबें ढीली कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि न केवल उनका पैसा बर्बाद होता है, बल्कि वन्यजीवों की तस्करी जैसे गंभीर अपराध को भी बढ़ावा मिलता है.

फिलहाल साहिल गौड़ को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में सक्रिय आरोपियों तक पहुंचने के लिए जांच जारी है. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोगों को भी जागरूक होना होगा. वन्यजीवों के अंगों का उपयोग न केवल अवैध है, बल्कि इससे प्रकृति और पारिस्थितिकी को भी गहरा नुकसान पहुंचता है.

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