राजस्थान के शिक्षा मंत्री और पंचायती राजमंत्री मदन दिलावर अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने कहा कि देसी गायों का दूध बच्चों की बुद्धि और ऊर्जा बढ़ाता है, जबकि भैंस का दूध उन्हें सुस्त बनाता है. दिलावर ने ये बातें कोटा जिले के रामगंज मंडी निर्वाचन क्षेत्र में 'गो-संवर्धन और गोचरण' कार्यक्रम में एक सभा को संबोधित करते हुए कहीं.
राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने कहा, 'ऊंची पीठ वाली देसी गाय का दूध पीने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है, जबकि भैंस का दूध पीने वाले लोग सुस्त स्वभाव के होते हैं.' अपने दावों को सही ठहराने के लिए मंत्री ने कुछ ऐसी गायों और भैंसों को चुनने का सुझाव दिया, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही बच्चों को जन्म दिया हो. उन्होंने कहा, 'ऐसी 5-7 गायें चुनिए जिन्होंने कुछ दिन पहले बच्चे को जन्म दिया हो और ऐसी ही भैंसें चुनिए. उनके बछड़ों को विपरीत दिशा में खड़ा करके छोड़ दीजिए. भैंस का बच्चा बड़ी मुश्किल से अपनी मां को ढूंढ पाएगा. वहीं गाय का बच्चा सीधा अपनी मां के पास चला जाएगा.'
मदन दिलावर ने इसका निष्कर्ष देते हुए कहा, 'इसका मतलब हुआ कि गाय का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धिमान होता है, जबकि भैंस का दूध पीने वाला बच्चा मानसिक रूप से कमजोर होता है.' एक और उदाहरण देते हुए दिलावर ने कहा, 'गाय और भैंस दोनों के बछड़ों को उनकी माताओं के पास वापस छोड़ने से पहले उन्हें भरपेट दूध पिलाएं. भैंस का बछड़ा कुछ कदम चलने के बाद खांसने लगेगा और ऊंघने लगेगा, जबकि गाय का बछड़ा अपनी पूंछ ऊपर उठाकर फुर्ती से उछलने लगेगा. अगर आपको अपने बच्चे को चंचल बनाना है तो गाय का दूध पिलाओ और ऊंघने वाला बनाना है तो भैंस का दूध पिलाओ.'
मंत्री मदन दिलावर ने गाय बछड़ों के लिए इस्तेमाल होने वाली अलग-अलग नामों का जिक्र किया. वहीं भैंस के बच्चे के लिए कहा, 'पैदा होने पर उसे पाड़ा कहते हैं और वह कितना भी बड़ा हो जाए उसे पाड़ा ही कहते हैं.' उन्होंने क्षेत्र के 14 गांवों में गाय चराने की प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए ‘ग्राम ग्वाला’ नियुक्त करने की घोषणा की. उन्होंने कहा, 'नई व्यवस्था के तहत 70 से अधिक गायों पर एक ग्राम ग्वाला नियुक्त किया जाएगा, जबकि संख्या अधिक होने पर दो ग्वाले रखे जाएंगे. प्रत्येक ग्राम ग्वाले को 10,000 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे और यह व्यवस्था गांव के दानदाताओं के सहयोग से संचालित होगी.'
क्या कहता है विज्ञान?
दूध (चाहे गाय का हो या भैंस का) दोनों ही मस्तिष्क के विकास के लिए अच्छे पोषक तत्व देते हैं, जैसे- प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन B12, आयोडीन, कोलीन, और ओमेगा-3 जैसे कुछ हेल्दी फैट्स. कई अध्ययनों में दूध पीने वाले बच्चों/वयस्कों में बेहतर कॉग्निटिव परफॉर्मेंस (मस्तिष्क की सोचने, सीखने, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने, समस्या सुलझाने और निर्णय लेने जैसी प्रक्रिया) दिखी है, लेकिन यह सामान्य रूप से दूध पीने से जुड़ा है, न कि गाय या भैंस के दूध में अंतर से. गाय का दूध थोड़ा हल्का (कम फैट, कम प्रोटीन) होता है, भैंस का दूध ज्यादा गाढ़ा, ज्यादा फैट और प्रोटीन वाला होता है. भैंस का दूध बच्चों के वजन बढ़ाने, हड्डियों और ऊर्जा के लिए अक्सर बेहतर माना जाता है. कोई भी विश्वसनीय वैज्ञानिक अध्ययन यह नहीं दिखाता कि भैंस का दूध पीने से बुद्धि सुस्त या मोटी हो जाती है.
चेतन गुर्जर