पायलट अनशन के जरिए आर-पार के मूड में! क्या 'हनुमान' की सलाह पर करेंगे अमल?

राजस्थान में कांग्रेस का आपसी झगड़ा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपनी ही पार्टी की सरकार के मुखिया अशोक गहलोत पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 11 अप्रैल को एक दिन का अनशन करने का ऐलान कर दिया है.

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सचिन पायलट और सीएम अशोक गहलोत (फाइल फोटो) सचिन पायलट और सीएम अशोक गहलोत (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 7:45 AM IST

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में घमासान मच गया है. रविवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर BJP के नेताओं को बचाने का आरोप लगाया. पायलट के बयान पर कांग्रेस (AICC) के राज्य प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि उन्हें इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि पायलट को पहले उनके सामने इस मुद्दे को उठाना चाहिए था. 

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क्या बोले प्रभारी रंधावा

रंधावा, जिन्हें पिछले दिसंबर में राजस्थान का AICC प्रभारी बनाया गया था, ने कहा कि पदभार संभालने के बाद से उनकी पायलट के साथ 20 से अधिक बैठकें हुई हैं, लेकिन उन्होंने कभी यह भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं उठाया. रंधावा ने कहा, 'हमने गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ कार्रवाई की है, उन्होंने सीएम के खिलाफ मानहानि का भी मामला दायर किया है. दूसरी बात यह है कि हमने राजस्थान में किसानों का कर्ज माफ करने, बिजली बिलों पर छूट, सिलेंडर पर सब्सिडी, पुरानी पेंशन वापस लाने जैसे कदम उठाए हैं.  उन्हें (पायलट) इसके बारे में बात करनी चाहिए थी. लेकिन यह (प्रेस कॉन्फ्रेंस) ठीक नहीं था.'

 रंधावा ने कहा कि वह मंगलवार को जयपुर जाएंगे और इस मुद्दे पर पायलट और गहलोत दोनों से बात करेंगे. उन्होंने कहा, 'पायलट ने दो पत्रों के बारे में बात की है. मैं उस पर भी गौर करूंगा और दोनों से बात करूंगा.'

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पायलट के आरोप

वहीं, सचिन पायलट ने रविवार को आरोप लगाते हुए कहा था, 'कांग्रेस पार्टी ने वादा किया था कि सत्ता में आएगी तो हम भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करेंगे, मगर मिली जुली के खेल में सारे मामले दबा दिए गए हैं. मैंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दो चिट्ठियां लिखी है और कहा है कि हमने और आपने जो आरोप लगाए थे उनकी जांच करवाईए, मगर कुछ नहीं हुआ.'

इतना ही नहीं, पायलट ने कहा, 'जब हमारी सरकार बनी थी तब भ्रष्टाचार को लेकर हमने कई बातें कहीं थी, लेकिन अब तक यह काम नहीं हुए हैं. इसे देखते हुए मैं 11 अप्रैल को शहीद स्मारक पर एक दिन का अनशन करूंगा. यह अनशन उन बातों को रखने और उन्हें करने लिए किया जा रहा है जो अब तक हमारी सरकार द्वारा नहीं हुईं.'

अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन
पायलट की मांग का उल्लेख किए बिना, कांग्रेस ने दिल्ली में एक बयान जारी किया और कहा कि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी सरकार ने उन योजनाओं को लागू किया है जिनसे लोगों को लाभ हुआ है और पार्टी इस साल के अंत में 'इन ऐतिहासिक उपलब्धियों' की बदौलत शानदार बहुमत हासिल करेगी. 

क्या हैं पायलट के कदम के मायने

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पायलट द्वारा गहलोत के खिलाफ नया मोर्चा खोलने के कदम को साल के अंत में होने वाले चुनावों से पहले नेतृत्व के मुद्दे को हल करने के लिए आलाकमान पर दबाव बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. पायलट पहले भी अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत कर चुके हैं. ऐसे में एक बार फिर उन्होंने आलाकमान को संदेश दिया है कि चुनाव से पहले नेतृत्व का मुद्दा हल होना चाहिए.

वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि पायलट अनशन के जरिए आलाकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं. इतना ही नहीं अगर कांग्रेस पार्टी उनकी मांगों पर एक्शन नहीं लेती है तो वह कोई अभूतपूर्व फैसला भी ले सकते हैं.

बेनीवाल की सलाह

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के मुखिया और सांसद हनुमान बेनीवाल ने पायलट को अलग पार्टी बनाने की सलाह देते हुए कहा,  'मैं पायलट साहब को पहले भी अलग पार्टी बनाने की सलाह दे चुका हूं. अगर वो अलग पार्टी बना लेते हैं तो राजस्थान में और भी बढ़िया, जबरदस्त मुकाबला हो सकता है. इस बार राजस्थान में भाजपा की राह कतई आसान नहीं है. हम लोग मिलकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों को रोकेंगे. दोनों दलों के साथ हम कोई गठबंधन नहीं करेंगे बल्कि दोंनों के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे पूरे राजस्थान में.'

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