NEET पेपर लीक का सबसे बड़ा सवाल...ऐसे टीचरों की NTA में एंट्री हुई कैसे? किन बड़े अधिकारियों के संपर्क में थे

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और पुणे की बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा मंडारे की गिरफ्तारी के बाद NTA की पेपर सेटिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि आखिर पेपर सेटर्स की पहुंच फाइनल प्रश्नपत्र तक कैसे बनी. इन टीचर के किन बड़े अधिकारियों से संबंध रहे हैं यी भी सीबीआई पता लगाने में जुटी है. 

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नीट मामले में पेपर सेट करने वाले टीचरों की गिरफ्तारी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है (Photo: ITG) नीट मामले में पेपर सेट करने वाले टीचरों की गिरफ्तारी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है (Photo: ITG)

शरत कुमार

  • जयपुर ,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:49 AM IST

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET पेपर लीक मामले में एक से एक बड़े खुलासे हो रहे हैं. अब तो जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर वे लोग, जिन्हें परीक्षा की गोपनीयता की रक्षा करनी थी, वही सिस्टम के भीतर इतनी गहरी पैठ कैसे बना बैठे. सीबीआई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं.

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इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम सामने आया है प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी का. जांच एजेंसियों के अनुसार कुलकर्णी वर्ष 2019 से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA से जुड़ा हुआ था. शुरुआत में उसे सब्जेक्ट एक्सपर्ट के तौर पर जोड़ा गया, लेकिन बाद में उसकी पहुंच सिर्फ एक विषय तक सीमित नहीं रही. सूत्रों का दावा है कि NEET के लिए तैयार किए जाने वाले कई सेट्स तक उसकी पहुंच बन गई थी. बताया जा रहा है कि NEET परीक्षा के लिए पांच अलग-अलग पेपर सेट तैयार किए जाते थे, जिनमें से अंतिम रूप से दो सेट चुने जाते थे. जांच में यह सामने आया है कि कुलकर्णी उन अंतिम चरणों तक पहुंच रखने वालों में शामिल था. अब सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर उसे NTA में किस अधिकारी ने प्रवेश दिलाया और किन वरिष्ठ अधिकारियों से उसके करीबी संबंध थे. जांच एजेंसियों को शक है कि यह कोई एक-दो लोगों का खेल नहीं था, बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित नेटवर्क था, जिसमें कोचिंग संस्थानों, पेपर सेटर्स और कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है.

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पुणे की प्रोफेसर मनीषा मंडारे की गिरफ्तारी ने बढ़ाए सवाल

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने पुणे की वरिष्ठ बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंडारे को भी गिरफ्तार किया है. एजेंसी उन्हें बायोलॉजी पेपर लीक का मास्टरमाइंड मान रही है. मनीषा मंडारे पुणे के शिवाजीनगर स्थित Modern College of Arts Science and Commerce में बॉटनी की लेक्चरर हैं. कॉलेज सूत्रों के मुताबिक वे पिछले पांच से छह वर्षों से NTA की प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी हुई थीं. सीबीआई के अनुसार मनीषा मंडारे को NEET-UG 2026 परीक्षा प्रक्रिया में एक्सपर्ट के रूप में नियुक्त किया गया था और उन्हें बॉटनी व जूलॉजी के प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच थी. जांच में जो बातें सामने आई हैं, उन्होंने अभिभावकों और छात्रों की चिंता और बढ़ा दी है. आरोप है कि अप्रैल 2026 के दौरान मनीषा मंडारे ने पुणे की मनीषा वाघमारे के जरिए कुछ चुनिंदा छात्रों को अपने घर बुलाया. वहां कथित तौर पर एक स्पेशल क्लास चलाई गई.

सीबीआई का दावा है कि इस दौरान छात्रों को ऐसे सवाल समझाए गए, जो बाद में परीक्षा में दिखाई दिए. छात्रों को नोटबुक में सवाल लिखवाए गए और किताबों में महत्वपूर्ण हिस्सों पर निशान भी लगवाए गए. यानी अब जांच सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं रही, बल्कि सिस्टमेटिक प्रेडिक्टिव ट्रेनिंग की दिशा में भी बढ़ चुकी है.

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आखिर कैसे बन गया ‘सीकर मॉडल’?

NEET पेपर लीक विवाद का सबसे बड़ा असर राजस्थान के सीकर पर दिखाई दे रहा है. जैसे ही जांच में कुछ तार सीकर से जुड़े, देशभर में फिर सीकर मॉडल पर बहस शुरू हो गई. दरअसल, NEET 2024 पेपर लीक मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, तब NTA ने शहरवार सफल छात्रों का डेटा अदालत में पेश किया था. उसी डेटा ने कई सवाल खड़े कर दिए थे. राजस्थान का छोटा सा शहर सीकर उस सूची में सबसे अलग दिखाई दिया. वहां से आने वाले छात्रों के परिणाम देश के बड़े महानगरों को भी पीछे छोड़ रहे थे. आंकड़ों के अनुसार सीकर में कुल 27,216 छात्रों ने NEET परीक्षा दी थी. इनमें 700 से ज्यादा अंक लाने वाले 149 छात्र थे, 650 से ज्यादा अंक लाने वाले 2037 छात्र थे, 600 से ज्यादा अंक लाने वाले 4729 छात्र थे,  550 से ज्यादा अंक लाने वाले 6338 छात्र थे इसी तरह 500 से ज्यादा अंक लाने वाले 8225 छात्र थे. ये आंकड़े अपने आप में हैरान करने वाले थे.

सबसे बड़ा सवाल तब उठा जब पूरे देश के टॉप 50 परीक्षा केंद्रों में से 37 केंद्र सिर्फ सीकर के निकले. सीकर के एक केंद्र, विद्या भारती स्कूल में ही 318 छात्रों ने 500 से ज्यादा अंक हासिल किए थे. शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मेहनत और कोचिंग की गुणवत्ता अपनी जगह है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर एक ही क्षेत्र से असाधारण रिजल्ट आने पर जांच होना स्वाभाविक है.

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लातूर पैटर्न भी जांच के घेरे में

राजस्थान के सीकर की तरह महाराष्ट्र का लातूर भी अब चर्चा के केंद्र में है. कभी बोर्ड परीक्षा के शानदार परिणामों के लिए प्रसिद्ध रहा लातूर पैटर्न अब NEET पेपर लीक जांच में बार-बार सामने आ रहा है. लातूर में 2024 में कुल 24,611 छात्रों ने NEET परीक्षा दी थी. इनमें 500 से ज्यादा अंक हासिल करने वाले छात्रों की संख्या 3534 थी, जो देश में छठे स्थान पर रही. लेकिन अब जांच एजेंसियों की नजर वहां संचालित कुछ निजी कोचिंग संस्थानों पर टिक गई है. सीबीआई ने हाल ही में RCC क्लासेस के संचालक शिवराज मोटेगांवकर से लंबी पूछताछ की. बताया गया कि 16 मई को उनसे करीब नौ घंटे तक पूछताछ हुई. इसके बाद एजेंसी ने उनके क्लासेस परिसर पर भी छापेमारी की.

RCC Classes लातूर में NEET और JEE तैयारी के बड़े संस्थानों में गिना जाता है. यहां करीब 14 हजार विद्यार्थियों के अध्ययन करने का दावा किया जाता है. जांच की शुरुआत उस वायरल वीडियो के बाद हुई, जिसमें खुद शिवराज मोटेगांवकर छात्रों से पूछते दिखाई दे रहे थे कि उनके “गेस पेपर” से कितने सवाल परीक्षा में आए. वीडियो में एक छात्र कहता सुनाई देता है कि 45 में से 42 सवाल बिल्कुल वही थे. यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसके बाद एक अभिभावक ने शिकायत दर्ज कराई.
अब सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह केवल असाधारण अकादमिक तैयारी थी या फिर सवालों तक पहले से पहुंच का मामला.

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क्या कोचिंग और सिस्टम के बीच बना था गुप्त नेटवर्क?

जांच एजेंसियों को सबसे बड़ा संदेह इसी बात पर है कि कहीं कुछ कोचिंग संस्थानों और परीक्षा प्रणाली के भीतर मौजूद लोगों के बीच कोई गुप्त नेटवर्क तो नहीं चल रहा था. क्योंकि जिन लोगों को पेपर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई, वही बाद में कोचिंग नेटवर्क से जुड़े दिखाई दे रहे हैं. अगर जांच में यह साबित होता है कि पेपर सेटर्स और कोचिंग संस्थानों के बीच सीधा संपर्क था, तो यह सिर्फ पेपर लीक नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा के साथ सुनियोजित खिलवाड़ माना जाएगा. शिक्षाविदों का कहना है कि अब समय आ गया है कि NTA की पूरी संरचना की स्वतंत्र जांच कराई जाए.

छात्रों और अभिभावकों में बढ़ता गुस्सा

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ा है, जो वर्षों की मेहनत के बाद NEET जैसी परीक्षा देते हैं. कई छात्रों का कहना है कि अगर कुछ लोगों को पहले से सवालों का अंदाजा या पहुंच मिल रही थी, तो यह मेहनती छात्रों के साथ सीधा अन्याय है. सोशल मीडिया पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं कि आखिर NTA की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर कैसे हो गई. कई अभिभावकों ने मांग की है कि पेपर सेटिंग प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों की बैकग्राउंड जांच हो और उनकी गतिविधियों की निगरानी की जाए.

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सीबीआई फिलहाल कई अहम बिंदुओं पर जांच कर रही है 

- NTA में एक्सपर्ट नियुक्ति की प्रक्रिया

- पेपर सेटर्स की चयन प्रणाली

- पेपर तक पहुंच रखने वाले अधिकारियों की भूमिका

- कोचिंग संस्थानों से संभावित संपर्क

- वायरल गेस पेपर और असली प्रश्नों के बीच समानता

- संदिग्ध वित्तीय लेनदेन

सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं.

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