कोटा में प्रसूताओं की मौत: लोक अदालत सख्त, 4 मौतों के बाद नोटिस जारी; 22 मई को सुनवाई

Kota Women Death Case: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का मामला अब कानूनी गलियारों तक पहुंच गया है. लापरवाही और संक्रमण के आरोपों के बीच स्थायी लोक अदालत के हस्तक्षेप ने प्रशासन और चिकित्सा विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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कोटा मेडिकल कॉलेज की लापरवाही पर कानूनी शिकंजा.(File Photo) कोटा मेडिकल कॉलेज की लापरवाही पर कानूनी शिकंजा.(File Photo)

चेतन गुर्जर

  • कोटा ,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:53 PM IST

राजस्थान के कोटा में 4 प्रसूताओं की मौत और 9 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है. लगातार सामने आ रही लापरवाही और संक्रमण की आशंकाओं के बीच स्थायी लोक अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं. मामले की अगली सुनवाई 22 मई को तय की गई है.

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अधिवक्ता इंतखाब अली खान, मोहम्मद अनीस बाबर, सानिया शैरी, पंकज मिश्रा और मुकेश कुमार की ओर से विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22बी के तहत स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया गया. याचिका में आरोप लगाया गया कि न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में प्रसूताओं की मौत चिकित्सा लापरवाही, संक्रमण और अव्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाओं का परिणाम है.

स्थायी लोक अदालत ने प्रकरण दर्ज करते हुए राजस्थान सरकार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रिंसिपल न्यू मेडिकल कॉलेज, अधीक्षक न्यू मेडिकल कॉलेज और अधीक्षक जेके लोन चिकित्सालय को नोटिस जारी किए हैं. अदालत ने सभी पक्षों से जवाब तलब करते हुए 22 मई को अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की है.

याचिका में कहा गया है कि अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटरों में स्वच्छता के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे. दूषित ओटी, संक्रमण, अस्वच्छ व्यवस्थाएं और कथित चिकित्सा लापरवाही के कारण कई प्रसूताओं की हालत गंभीर हुई, जबकि चार महिलाओं की मौत हो गई. मामले ने पूरे कोटा संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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प्रार्थना पत्र में पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है. साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई है.

इस मामले को लेकर अब प्रशासन और चिकित्सा विभाग पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है. लगातार बढ़ते विवाद और मौतों के बाद यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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