वैसे तो आपने बाबा श्याम के कई अनोखे भक्त देखे होंगे, लेकिन राजस्थान के अलवर के एक युवा भक्त की इन दिनों पूरे देश में चर्चा हो रही है. अलवर का रहने वाला नितेश 160 किलोमीटर की दंडवत यात्रा के लिए अलवर से रवाना हो चुका है. 1000 लोहे की नुकीली कीलों से बने लकड़ी के फट्टे पर लेटकर नितेश अलवर से खाटू श्याम जी तक अपनी दंडवत यात्रा करीब डेढ़ महीने में पूरी करेंगे. इस दौरान उनके साथ उनके दोस्त और परिवार के करीब 15 लोग भी रहेंगे.
नितेश दूसरी बार अलवर से खाटू श्याम जी तक लोहे की कीलों पर लेटकर दंडवत यात्रा कर रहे हैं. पिछले साल उन्होंने 501 लोहे की नुकीली कीलों का फट्टा तैयार करवाया था, जबकि इस बार कीलों की संख्या बढ़कर 1000 हो गई है.
अलवर के अशोक टॉकीज क्षेत्र के रहने वाले नितेश ने बीते गुरुवार को शिवाजी पार्क स्थित खाटू श्याम मंदिर से 160 किलोमीटर की अपनी दंडवत यात्रा शुरू की है. इस दौरान वह करीब 1000 लोहे की कीलों से बने नुकीले फट्टे पर लेटकर आगे बढ़ रहे हैं. नितेश ने बताया कि 5 साल पहले वह बाबा श्याम को नहीं जानते थे, लेकिन एक दिन परेशानी में उन्होंने दोस्तों के साथ रिंगस से पैदल यात्रा करते हुए निशान लेकर बाबा श्याम के मंदिर में दर्शन किए. इसके बाद से उनकी आस्था और मजबूत हो गई.
पिछले साल 501 कीलों वाले फट्टे पर पूरी की थी यात्रा
नितेश कैटरिंग का काम करते हैं. पिछले साल उन्होंने 501 कीलों वाले फट्टे पर यह यात्रा पूरी की थी, जबकि इस बार उन्होंने 1000 कीलों वाला करीब 3 फुट चौड़ा लकड़ी का फट्टा तैयार करवाया है. शुरुआत में परिवार ने इस तरह की यात्रा का विरोध किया था, लेकिन उनकी जिद के आगे सभी मान गए और अब परिवार भी इस यात्रा में उनका साथ दे रहा है.
नितेश का कहना है कि वह 160 किलोमीटर का यह सफर करीब डेढ़ महीने में पूरा करेंगे. उन्होंने कहा कि यह उनकी आस्था है और दंडवत यात्रा के दौरान उन्हें किसी तरह की तकलीफ महसूस नहीं होती. उनके मुताबिक, बाबा श्याम की कृपा से उन्हें दर्द का एहसास भी नहीं होता.
परिवार के 15 लोग भी पैदल चल रहे हैं
इस यात्रा में उनके साथ दोस्त और परिवार के 15 लोग भी पैदल चल रहे हैं. रास्ते में रुकने और खाने-पीने की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इसके बावजूद वे यात्रा जारी रखे हुए हैं. नितेश किसी से मदद नहीं लेते, हालांकि अगर कोई स्वेच्छा से सहायता करता है तो उसे स्वीकार कर लेते हैं. सभी खर्च वह खुद ही उठाते हैं.
हिमांशु शर्मा