NEET 2026 पेपर लीक केस की जांच में अब ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलते जा रहे हैं. CBI की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल ने माना है कि उसने अपने बेटे के लिए 10 लाख रुपये खर्च कर पेपर लिया था, लेकिन इसके बावजूद उसका बेटा परीक्षा में केवल 107 नंबर ही ला सका.
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक दिनेश बिवाल ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने बेटे ऋषि को लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था. दावा है कि करीब 10 लाख रुपये की डील के जरिए पेपर हासिल किया गया, लेकिन परीक्षा में अपेक्षित फायदा नहीं मिला. सूत्रों का कहना है कि 600 नंबर का पेपर लाने के बावजूद उसका बेटा सिर्फ 107 अंकों तक ही पहुंच पाया. CBI अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसमें पेपर लीक, टैलीग्राम पर PDF शेयरिंग, छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने और लाखों रुपये के लेन-देन की बात सामने आ रही है.
सीकर फ्लैट बना जांच का बड़ा लिंक
जांच एजेंसियों के मुताबिक मंगीलाल और दिनेश इस पूरे नेटवर्क में कोरियर की भूमिका निभा रहे थे. आरोप है कि ये लोग कथित लीक प्रश्नपत्र को अलग-अलग छात्रों तक पहुंचाने का काम कर रहे थे. सूत्रों के अनुसार दिनेश बिवाल ने राजस्थान के सीकर में एक फ्लैट लिया हुआ था, जहां उसका बेटा रहता था. दिनेश का वहां लगातार आना-जाना भी था. जांच एजेंसियों को शक है कि इसी फ्लैट से कई छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाए गए. सीकर पहले से ही देश के बड़े कोचिंग हब के तौर पर जाना जाता है. ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह नेटवर्क कोचिंग सर्किल तक भी फैला हुआ था.
CBI रिमांड पेपर में बड़े दावे
NEET केस में गिरफ्तार पांच आरोपियों के रिमांड पेपर की कॉपी आज तक/इंडिया टुडे के पास है. इन्हीं दलीलों के आधार पर अदालत ने पांचों आरोपियों को 7 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है. CBI ने अदालत से कहा कि आरोपियों से गहन पूछताछ जरूरी है, क्योंकि मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है. एजेंसी का कहना है कि इसके तार बड़े नेटवर्क और संभावित अंदरूनी मदद तक जा सकते हैं. CBI ने कोर्ट को बताया कि पूछताछ इसलिए जरूरी है ताकि पेपर लीक जैसे अपराध दोबारा न हों, पूरे नेटवर्क में शामिल बाकी आरोपियों की पहचान हो सके, मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस की जांच की जा सके, पैसों के लेन-देन का ट्रेल सामने आ सके, सबूत मिटाने और गवाहों को प्रभावित करने से रोका जा सके, प्रश्नपत्र लीक होने के असल स्रोत तक पहुंचा जा सके और NTA और अन्य विभागों के संभावित संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की जांच हो सके.
नासिक से गुरुग्राम तक फैला नेटवर्क
CBI जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2026 में नासिक निवासी शुभम ने यश यादव को बताया था कि मंगीलाल अपने छोटे बेटे के लिए NEET UG-2026 का कथित लीक पेपर चाहता है. यहीं से 10 से 12 लाख रुपये की डील शुरू हुई. जांच एजेंसी के मुताबिक मंगीलाल ने WhatsApp पर यश यादव से संपर्क किया और कथित प्रश्नपत्र मांगे. शुभम ने भरोसा दिलाया कि पैसे के बदले असली पेपर उपलब्ध कराया जाएगा. 29 अप्रैल 2026 को शुभम ने यश यादव से 10वीं-12वीं के ओरिजिनल दस्तावेज, NEET रोल नंबर और एक चेक सिक्योरिटी के तौर पर मांगा. इसके बाद यश यादव ने अपने दोस्त यश कक्कड़ को मंगीलाल से दस्तावेज और चेक लेने भेजा. CBI के अनुसार यश कक्कड़ ने दस्तावेज और चेक तो ले लिए, लेकिन उन्हें आगे शुभम तक नहीं भेजा.
500-600 सवाल आएंगे, Telegram पर भेजी गई PDF
जांच एजेंसी का दावा है कि शुभम ने कहा था कि वह Physics, Chemistry और Biology के करीब 500-600 सवाल देगा, जिनसे अच्छे नंबर लाए जा सकते हैं और बड़े मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल सकता है. 29 अप्रैल को कथित तौर पर Telegram के जरिए PDF फाइल भेजी गई. CBI के मुताबिक बरामद PDF में तीनों विषयों के प्रश्नपत्र के साथ शुभम और मंगीलाल के बीच हुई चैट भी मिली है. जांच एजेंसी का कहना है कि मंगीलाल खटीक को यह पेपर गुरुग्राम निवासी यश यादव से मिला था. डील यह थी कि अगर करीब 150 सवाल असली पेपर से मैच हो जाते हैं तो 10 लाख रुपये दिए जाएंगे.
रिश्तेदारों और दोस्तों तक पहुंचा कथित पेपर
CBI जांच में यह भी सामने आया है कि मंगीलाल ने कथित लीक पेपर की प्रिंट कॉपी अपने बेटे अमन बिवाल, रिश्तेदार ऋषि और गुंजन को दी थी, जो NEET उम्मीदवार थे. इतना ही नहीं, विकास बिवाल के दोस्तों तक भी ये पेपर पहुंचाए गए. जांच एजेंसी का दावा है कि मंगीलाल ने अपने परिचित शिक्षक सत्यनारायण को भी कथित प्रश्नपत्र दिए थे. आरोप है कि ऑसर शीट के साथ पेपर पैसों के बदले उपलब्ध कराए जा रहे थे. पूछताछ में विकास बिवाल ने बताया कि सीकर में कोचिंग के दौरान उसकी मुलाकात यश यादव से हुई थी. CBI के मुताबिक यश यादव ने दावा किया था कि वह पैसे लेकर NEET का लीक पेपर दिला सकता है.
विकास ने बताया कि उसके छोटे भाई अमन के लिए भी पैसों के बदले पेपर दिलाने की बात हुई थी. यश यादव ने विकास से कहा था कि वह दूसरे उम्मीदवार भी जोड़कर लाए. बदले में उसे फ्री पेपर देने की बात कही गई थी. इसके बाद कई छात्रों की जानकारी WhatsApp और Instagram के जरिए यश यादव को भेजी गई. CBI को शक है कि इसी तरह यह नेटवर्क धीरे-धीरे कई छात्रों तक फैल गया. जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि यश यादव के फोन से कई संदिग्ध चैट बरामद हुई हैं. हालांकि CBI का दावा है कि उसने अपने iPhone से कई अहम डेटा और सबूत डिलीट कर दिए थे. अब फोन को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. एजेंसी को उम्मीद है कि डिलीट डेटा रिकवर होने के बाद कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं.
शरत कुमार