मां नहीं, पिता मजदूर, ऐसे में पुलिस अधिकारी बना दो गरीब बेटियों का सहारा, पत्नी संग किया कन्यादान

अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र में थानाधिकारी भगवान सहाय मीना ने दो गरीब बेटियों की शादी अपने घर से कराई. पत्नी मुस्कान मीना के साथ मिलकर उन्होंने कन्यादान भी किया. दोनों बेटियों की मां नहीं थी और पिता मजदूरी करते हैं. इस मानवीय पहल की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है और लोग इसे इंसानियत की मिसाल बता रहे हैं.

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SHO ने निभाया पिता का फर्ज दो गरीब बेटियों की कराई शादी. (Photo: Screengrab) SHO ने निभाया पिता का फर्ज दो गरीब बेटियों की कराई शादी. (Photo: Screengrab)

हिमांशु शर्मा

  • अलवर ,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

राजस्थान के अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां जमवारामगढ़ में तैनात थानाधिकारी भगवान सहाय मीना ने दो गरीब और बेसहारा बेटियों के जीवन में खुशियों की नई शुरुआत कराई. उन्होंने अपने घर से इन दोनों बेटियों की शादी पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराई. यह मामला ग्राम पलवा का है, जहां दो निर्धन बेटियों की शादी को लेकर परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. दोनों बेटियों की मां का पहले ही निधन हो चुका था, जबकि उनके पिता मजदूरी करके किसी तरह घर चला रहे थे. ऐसे में बेटियों की शादी परिवार के लिए बड़ी चिंता बन गई थी.

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इसी दौरान थानाधिकारी भगवान सहाय मीना और उनकी पत्नी मुस्कान मीना ने आगे बढ़कर इन बेटियों की जिम्मेदारी उठाई. उन्होंने अपने निवास स्थान को ही बेटियों का मायका बना दिया और पूरी परंपरा के साथ विवाह की सभी रस्में पूरी कराईं. शादी में गांव और आसपास के लोगों ने भी सहयोग किया और परिवार की तरह शामिल हुए. विवाह समारोह के दौरान माहौल भावुक था. कई लोगों की आंखें नम थीं, लेकिन बेटियों के चेहरे पर नई जिंदगी की शुरुआत की खुशी भी साफ दिखाई दे रही थी. गांव के लोगों ने इस पहल को इंसानियत की सच्ची मिसाल बताया.

गरीब बेटियों की शादी कर जीत लिया लोगों का दिल

ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब लोग एक-दूसरे से दूरी बना लेते हैं, ऐसे में पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया यह कार्य समाज के लिए एक बड़ा संदेश है. लोगों ने कहा कि भगवान सहाय मीना ने यह साबित कर दिया कि वर्दी केवल कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि इंसानियत की भी पहचान हो सकती है. भगवान सहाय मीना लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं. वहीं उनकी पत्नी मुस्कान मीना भी जरूरतमंद लोगों की मदद में लगातार जुड़ी रहती हैं. दोनों ने मिलकर यह साबित किया कि छोटे प्रयास भी किसी के जीवन में बड़ी खुशियां ला सकते हैं.

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थानेदार ने घर को बनाया बेटियों का मायका

इस अवसर पर भगवान सहाय मीना ने कहा कि जरूरतमंद बेटियों की मदद करना हर किसी का कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि अगर किसी के प्रयास से किसी परिवार के चेहरे पर मुस्कान आती है तो यह सबसे बड़ा सौभाग्य है. यह विवाह समारोह अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है. लोग इस पहल को केवल एक शादी नहीं बल्कि मानवता, अपनापन और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण मान रहे हैं. यह कहानी लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक प्रेरणा के रूप में याद रखी जाएगी.

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