राजस्थान के अलवर जिले में बुधवार को मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे. ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन के देशव्यापी बंद के आह्वान के समर्थन में जिलेभर के दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं. इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ा, जिन्हें दवाइयों के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकना पड़ा.
दवा व्यापारियों की मांग है कि ऑनलाइन दवा कंपनियों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं, दवाओं पर टैक्स कम किया जाए और ई-फार्मेसी पर नियंत्रण लगाया जाए. व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सस्ती दरों में दवाइयां बेची जा रही हैं, जिससे पारंपरिक मेडिकल कारोबार प्रभावित हो रहा है.
अलवर में हैं कुल 2300 मेडिकल स्टोर
अलवर जिले में करीब 2300 मेडिकल स्टोर हैं. जिले में दो मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, जनाना अस्पताल, शिशु अस्पताल, 145 सीएचसी, 250 से ज्यादा पीएचसी और करीब 65 निजी अस्पताल संचालित हैं. यहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. आसपास के जिलों और हरियाणा व उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में मरीज अलवर आते हैं.
हालांकि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत अस्पतालों में मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन कई जरूरी दवाइयां अक्सर उपलब्ध नहीं हो पातीं. ऐसे में मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं. लेकिन बंद के चलते मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी.
व्यापारियों ने सरकार को दी धमकी
अलवर शहर के बिजली घर चौराहे समेत सभी प्रमुख दवा बाजार बंद रहे. दवा व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. व्यापारियों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा.
इस बंद का सबसे ज्यादा असर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ा. कई परिजनों ने बताया कि ऑपरेशन और नियमित इलाज के लिए जरूरी दवाइयां नहीं मिल पाने से मरीजों की हालत बिगड़ रही है. लिवर, किडनी और हार्ट जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को रोजाना दवाइयों की जरूरत होती है, लेकिन मेडिकल स्टोर बंद होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
हिमांशु शर्मा