अजित पवार ने अपनी राजनीति की शुरुआत की, वहीं उनका निधन हुआ. यानी कि बारामती में. अजित पवार पूरे महाराष्ट्र के अजित दादा थे. दादा यानी कि बड़ा भाई, कोई बड़ा हो, छोटा हो, महिला हो, पुरुष हो, कार्यकर्ता हो, नेता हो, अपनी पार्टी का हो या दूसरी पार्टी का हो. अजित पवार सबके लिए अजित दादा थे. अजित पवार के जाने से महाराष्ट्र की मराठा राजनीति में एक वैक्यूम बन गया है.. जिसका भरना अभी तो बहुत मुश्किल दिख रहा है. महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार होना आसान नहीं होता है. अजित पवार सिर्फ एक राजनीतिक शख्स ही नहीं थे बल्कि वो कार्यकर्ताओं के हित वाली राजनीति का पूरा विश्वविद्यालय थे. इसीलिए तो उनकी मौत की खबर सुनते ही पूरे महाराष्ट्र भर के कार्यकर्ता बारामती पहुंचने लगे हैं.