कोई एक से ज़्यादा नाम रख ले, तो इसमें हैरानी की कोई बात नहीं, लेकिन कोई हर छह महीने में नए चेहरे के साथ दुनिया के सामने हाज़िर हो जाए, तो हैरान होना लाज़िमी है. ये कहानी है एक ऐसे ही शख्स की. वो कोई बहरुपिया या कोई स्टेज आर्टिस्ट नहीं बल्कि जुर्म का दुनिया का एक ऐसा किरदार है, जिसका किसी मामले में शामिल होना ही पुलिस के पसीने छुड़ा देने की गारंटी है. उसका असली चेहरा नाम है रवि कुमार गुप्ता, लेकिन अब इसी रवि कुमार गुप्ता की हालत ऐसी हो चुकी है कि खुद उसके साथ उसके गैंग में रहकर वारदात को अंजाम देनेवाले गुनहगार तक उसे नहीं पहचान पा रहे हैं, पुलिस उसे क्या पहचानेगी.