अगर अमेरिका और ईरान डील के इतने ही करीब हैं तो दोनों के सुर अलग अलग क्यों हैं. आखिर क्यों अमेरिका लगातार कह रहा है कि वो समझौते के बेहद करीब है जबकि ईरान आधिकारिक तौर पर इस पर चुप्पी साधे हुए है. इतना ही नहीं, अमेरिका इस बीच ईरान को डील ना होने की सूरत में नतीजा भुगतने की धमकी भी दे रहा है. क्या समझौते की शर्तें छिपाई जा रही हैं या फिर समझौते का सस्पेंस कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है.